कलीनगर। लखनऊ की शान कही जाने वाली गोमती नदी की अविरल धारा तमाम प्रयासों के बाद भी नहीं बह सकी। जहां पूर्व सरकारों के कार्यकाल में गोमती नदी की अविरलता को लेकर कई प्रोजेक्ट बने, निर्माण कार्य के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च भी कर दिए गए। लेकिन गोमती का उद्धार न हो सका।
भाजपा सरकार के पिछले कार्यकाल में गोमती को प्रदूषण मुक्त कर अविरल धारा बहाने के लिए योजना बनी थी लेकिन पांच साल बीतने के बाद भी कुछ नहीं हो सका। आलम यह है कि गोमती उद्गम स्थल के आगे निकलते ही जनपद सीमा में कई स्थानों पर नदी की जमीन पर कब्जे हो गए।
चुनाव के दौरान पूरनपुर में जनसभा को संबोधित करने पहुंचे सीएम योगी आदित्यनाथ ने अपने भाषण में गोमती उद्गम स्थल पर चिंता जताई थी। अब प्रदेश में दोबारा भाजपा की सरकार बनने के बाद गोमती भक्तों की उम्मीद फिर से जागी है। उनका मानना है कि आने वाले दिनों में शासन की नजर पड़ेगी। गोमती फिर से अपने पुराने अस्तित्व में लौट सकेगी। उद्गम स्थल का भी विकास होगा।
पूर्व सरकारों में बनते रहे प्रोजेक्ट, होता रहा बंदरबांट
गोमती के जीर्णोद्धार को बसपा सरकार के कार्यकाल में 22 करोड़ के दो प्रोजेक्ट बनाए गए थे। इसमें कुछ धनराशि देकर काम भी कराए गए लेकिन कार्य मनरेगा से न होने की बात कहते हुए काम बीच में ही रोक दिया गया। तत्कालीन सपा सरकार में सिंचाई मंत्री रहे शिवपाल सिंह यादव ने गोमती को पुनर्जीवित करने के प्रयास किया, जिसके बाद प्रोजेक्ट बने। पहले प्रोजेक्ट में करोड़ों रुपये खर्च कर उद्गम स्थल की झीलों की खुदाई की गई। इसके बाद गोमती उद्गम स्थल तक 25 क्यूसेक पानी देने के लिए 1.90 करोड़ रुपये खर्च किए गए। जब पानी छोड़ने की बारी आई तो उद्गम स्थल तक पानी ही नहीं पहुंच सका। उद्गम स्थल से जनपद सीमा तक खुदाई कर अविरल धारा बहाने के लिए एक और प्रोजेक्ट बनाया गया। प्रोजेक्ट को मंजूरी तो मिली लेकिन बजट रिलीज नहीं किया गया। इसके बाद सरकार चली गई।
गोमती के रास्ते पर कब्जों की भरमार
गोमती नदी के रास्ते पर अवैध कब्जेदारों ने कब्जे कर खेती करनी शुरू कर दी। जिले में गोमती नदी 33 गांवों से होकर गुजरती है। इनमें कई ऐसे गांव हैं जहां गोमती नदी के क्षेत्र में अवैध कब्जों की भरमार है। कई स्थानों पर खेती हो रही है और कई स्थानों पर गोमती की चौड़ाई नाम मात्र ही है। गोमती क्षेत्र को खाली कराने के प्रयास तो हुए, लेकिन कुछ समय बाद मामला ठंडे बस्ते में पड़ने से स्थिति जस की तस हो गई है।
कई अभियान चलाए पर कोई काम नहीं आ पाए
गोमती नदी को पुनर्जीवित करने के लिए पूर्व में कई अभियान चलाए गए। गोमती उद्गम स्थल से गोमती संरक्षण के अभियान की भी शुरूआत हुई थी। पूरे 960 किमी लंबी यात्रा के बाद इसका समापन भी गंगा में समाहित होने वाले स्थान पर किया गया। इसमें स्वामी विज्ञानंद गंगा, जितेंद्र लोक भारती के आचार्य बृजेंद्र पाल सिंह, जैविक कृषि विशेषज्ञ राज कुुमार, पर्यावरणविद् चंद्रभूषण तिवारी जैसे दिग्गज भी शामिल हुए, लेकिन संरक्षण के नाम पर चलाया गया अभियान भी सफल नहीं हो सका। इसके अलावा कई अन्य क्षेत्रीय स्वयंसेवी संगठनों ने अभियान पर बयानबाजी तो खूब की लेकिन इसके बाद पलटकर नहीं देखा। जल पुरुष राजेंद्र सिंह के प्रयास भी सफल नहीं हुए।
गोमती एक्सप्रेस वे की घोषणा से बढ़ेगी रौनक
पिछले दिनों गोमती एक्सप्रेस-वे की भी घोषणा हो चुकी है। उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही इस पर कार्य शुरू होगा। गोमती के किनारे होकर एक्सप्रेस-वे बनाया जाएगा जो उत्तराखंड के हल्द्वानी तक पहुंचेगा। लखीमपुर के दुधवा नेशनल पार्क और पीलीभीत में टाइगर रिजर्व के क्षेत्र से होकर हाईवे को गुजरना है।
प्रशासन की दिलचस्पी से उद्गम स्थल पर हुए विकास कार्य
गोमती नदी की धारा तो अविरल नहीं हो सकी, लेकिन उद्गम स्थल का नजारा बदलने में प्रशासन का योगदान अहम रहा। परिसर क्षेत्र में सौंदर्यीकरण के साथ अन्य विकास कार्य कराए गए। गोमती मैया का मंदिर स्थापित किया गया। उद्गम स्थल आने वाले भक्तों की सुविधा के लिए कैंटीन का संचालन भी शुरू कराया गया, हालांकि अभी कैंटीन बंद है।
फैक्ट फाइल
- कलीनगर तहसील में फुलहर गांव में है गोमती का उद्गम स्थल
- 960 किमी लंबी है गोमती नदी
- वाराणसी के कैथी में गंगा में मिल जाती है गोमती
- 22 छोटी नदियां मिलती है इसमें
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डीपीआरओ ने पिछले दिनों की कराई थी साफ-सफाई
डीपीआरओ सुबोध जोशी ने पिछले दिनों ही गोमती उद्गम स्थल पर साफ सफाई और पौधरोपण कराया था उन्होंने स्थानीय लोगों के साथ यहां आरती भी की थी। उनका कहना था कि गोमती स्थल को बहुत बेहतर बनाया जा सकता है, लेकिन उसकी स्थिति बेहद खराब थी।
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दो नदियों के पुनरुद्धार की योजना भी अभी ठंडे बस्ते में पड़ी
चुनाव से पहले शासन स्तर से पीलीभीत से शाहजहांपुर और हरदोई तक 195.9 किलोमीटर तक देहवा नदी और पीलीभीत से शाहजहांपुर तक 35.8567 किलोमीटर तक कटना नदी को प्रदेश की अन्य नदियों के साथ पुनरुद्धार के लिए चयनित किया था। अभी तक योजना धरातल पर नहीं उतर सकी। बजट न मिलने से नदियों को संवारने का कार्य भी शुरू नहीं हो सका।
शासन की कई योजनाओं के तहत गोमती उद्गम स्थल पर कार्य हुए हैं। गोमती उद्गम स्थल को लेकर कोई नए निर्देश आते हैं तो उसके तहत तत्काल कार्य कराए जाएंगे। जिले की दो नदियां देहवा नदी और कटना के पुनरुद्धार की योजना है। उसका बजट आते ही कार्य शुरू करा दिया जाएगा। - पुलकित खरे, डीएम
गोमती नदी की अविरल धारा तमाम प्रयास के बाद भी नहीं बह सकी। गोमती लखनऊ की शान है, उम्मीद है कि सरकार इस बार गोमती को पुनर्जीवित करने के प्रयास करेगी। - राहुल सिंह, माधोटांडा
गोमती नदी गंगा की सहायक नदी है। इसे नमामि गंगे योजना में शामिल करना चाहिए। अविरल धारा के प्रयास शुरू किए जाने जरूरी हैं। पूर्व में कई प्रयास हुए, लेकिन सब अधूरे ही रह गए। योगेश्वर सिंह, माधोटांडा