पूरनपुर। कोर्ट में कनिष्ठ लिपिक की नौकरी दिलाने का झांसा देकर मोहल्ला चौक के जुनैद उल हसन खां से दो लाख रुपये लेकर फर्जी नियुक्तिपत्र थमा दिया गया। फोन आने पर कोर्ट में जाकर ज्वाइन करने को कहा गया, लेकिन कोई फोन कॉल नहीं आई। बाद में पता चला कि नियुक्ति पत्र फर्जी था। पुलिस ने न्यायालय के आदेश पर तीन आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की है।
जुनैद उल हसन ने दर्ज कराई रिपोर्ट में कहा कि छह साल पहले महार्षि यूनिवर्सिटी ऑफ रोड इंफार्मेशन टेक्नालॉजी आईएम मडिगांव लखनऊ के दिनेश सिंह से उसकी मुलाकात गांव जटपुरा में हुई थी। दिनेश ने इंदिरा नगर लखनऊ के करन सिंह से जान पहचान होने की बात कहकर नौकरी लगवाने का झांसा दिया।
नौकरी लगवाने को दो लाख रुपये बताए। साथ ही 27 हजार रुपये वेतन मिलने की जानकारी दी। अप्रैल 2025 को दिनेश ने फोन कर लखनऊ बुलाया। लखनऊ में यूनिवर्सिटी के संदीप सिंह से उसे मिलवाया। इसके बाद दोनों उसे करन से मिलवाने आर्य इंफोटेड एंड सिक्योरिटी सर्विस के कार्यालय में ले गए। वहां बातचीत कर वह घर लौट आया।
18 फरवरी 2026 को दिनेश ने फोन कर दो लाख रुपये लेकर चलने और नियुक्तिपत्र मिलने की जानकारी दी। उसी दिन दिनेश के साथ लखनऊ गए। रुपये लेकर उसे नियुक्तिपत्र दे दिया गया। बताया गया कि फोन आने पर मुरादाबाद में स्थित कोर्ट चले जाना। कई दिन तक इंतजार करने के बाद फोन कॉल नहीं आई। इस दौरान पता चला कि कोर्ट में कनिष्ठ लिपिक का कोई पद रिक्त नहीं है। दिया गया नियुक्तिपत्र भी फर्जी है। होली पर दिनेश के गांव जटपुरा आने की जानकारी पर पहुंचा और रुपये वापस मांगे। आरोप है कि वहां उसकी पिटाई की गई। दोबारा रुपये मांगने पर जान से मारने की धमकी दी गई। पुलिस का कहना है कि मामले की विवेचना शुरू कर दी गई है।