पीलीभीत। जिला मुख्यालय स्थित रोडवेज बस स्टैंड से कई बसों का संचालन लंबी दूरी पर किया जा रहा है। मगर, इन बसों पर एक चालक को ही भेजा जा रहा है। इससे हर समय हादसे का खतरा बना हुआ है। इसको लेकर कई अफसरों से शिकायत भी की गई, इसके बाद भी चालकों की समस्या का समाधान नहीं किया जा रहा है।
जिला मुख्यालय से 117 बसों का संचालन हो रहा है। मौजूदा समय में रोडवेज डिपो पर स्वयं के 17, जबकि संविदा के 180 चालक कार्यरत है। जिनसे बसों का संचालन कराया जा है। शासन का आदेश है कि 600 किमी की दूरी तक जाने वाले बसों पर दो चालकों का भेजना अनिवार्य है। जिससे इनका संचालन सुगमता से हो सके। वहीं चालक को बस संचालन के दौरान आराम मिल सके और होने वाले हादसों पर रोक लगाई जा सके। स्थानीय डिपो से दिल्ली, कानपुर, लखनऊ,वाराणसी आदि लंबी दूरी के लिए बसों का संचालन है। इनकी दूरी लगभग 600 किमी के आसपास ही है। इसके बाद भी अफसर लंबी दूरी जाने वाले मार्ग पर एक ही चालक को भेजकर यह दूरी तय कराई जा रही है। ऐसे में चालकों को आराम न मिलने से हर समय हादसे का खतरा बना रहता है।
अफसरों की लापरवाही दे सकती है बड़े हादसे को दावत
डिपो के चालक और परिचालकों ने बताया कि कई बार नींद न पूरी होने पर वह रास्ते में पड़ने वाले ढाबों पर रुककर थोड़ा आराम करते हैं। ऐसे में जब बस देरी से डिपो पर पहुंचती है, तब चालक को विभागीय अफसर जिम्मेदार ठहराते हैं। दिल्ली तक करीब 620 किमी दूरी तय करनी होती है। ऐसे में हर समय हादसे का खतरा बना रहता है।
दिल्ली मार्ग की दूरी सही है। इसलिए इस मार्ग पर एक चालक को भेजा जाता है। जबकि कुछ एक जगह की दूरी अधिक है। जहां दो चालक भेजे जा रहे हैं। -पवन कुमार श्रीवास्तव, एआरएम।