कलीनगर। माधोटांडा गांव के मुख्य मार्ग पर शनिवार रात आई आंधी के दौरान गिरा बरगद का विशाल पेड़ 22 घंटे बाद हटाया जा सका। पेड़ गिरने से माधोटांडा-पूरनपुर मार्ग पर यातायात ठप रहा। छोटे वाहन गांव के अंदर से होकर निकले। इससे गालियां भी जाम रहीं। बढ़े वाहन कलीनगर मार्ग से गुजरते रहे। दरअसल पेड़ जिला पंचायत के अधीन होने के चलते सामाजिक वानिकी ने हस्तक्षेप नहीं किया। जिला पंचायत के कर्मचारियों के पहुंचने के बाद पेड़ काटने की अनुमति दी गई।
माधोटांडा गांव की आबादी के बीच दशकों पुराना बरगद का पेड़ खड़ा था। माधोटांडा-पूरनपुर मार्ग के किनारे खड़े पेड़ की जड़ सप्ताह भर पूर्व जर्जर हो गई थी। जानकारी होने पर सामाजिक वानिकी विभाग की ओर से दो कर्मचारियों को मौके पर भेजा गया, हालांकि जिला पंचायत के अधीन होने के चलते वनकर्मियों ने पेड़ को काटने से मना कर दिया गया था। शनिवार रात अचानक आई आंधी में पेड़ जड़ से उखड़ कर गिर गया।
रात होने के चलते बड़ा हादसा बच गया, लेकिन मस्जिद का कुछ भाग और बिजली के खंभे क्षतिग्रस्त हो गए थे। मुख्य मार्ग का यातायात ठप हो गया था। पुलिस ने मार्ग के दोनों ओर बैरिकेडिंग कर दी थी लेकिन छोटे वाहनों को गांव के अंदर से निकाला गया। गालियों में वाहनों की दिनभर कतार चलती रही। इधर रविवार को करीब 12 बजे जिला पंचायत कर्मचारी मौके पर पहुंचे पेड़ काटने की अनुमति देने के बाद कटान शुरू किया गया। इसमें बाद देर शाम छह बजे तक पेड़ को मार्ग से हटाया जा सका। पेड़ हटने के बाद मार्ग पर यातायात सुचारु हुआ।
पेड़ काटने पर आसपास के लोग हुए भावुक- ग्रामीणों के मुताबिक बरगद का पेड़ लगभग 100 साल पुराना था। आसपास क्षेत्र की पहचान भी बरगद के पेड़ से ही होने लगी थी। बरगद का मोहल्ला गांव में मशहूर हो गया था। रविवार को पेड़ कटने पर आसपास रहने वाले लोग भावुक दिखाई दिए।