बीसलपुर। तहसील क्षेत्र में मार्गों पर भरा बाढ़ का पानी कम हो जाने से बरेली, खुदागंज और फरीदपुर मार्ग शुक्रवार से चालू हो गए। बरेली मार्ग पर गांव गोवल और हेतम नगला के बीच पुलिया का कुछ हिस्सा ढह जाने से आवागमन प्रभावित हुआ, जिस पर पुलिस ने रोड़ा डलवाकर यातायात सुचारू कराया।
बृहस्पतिवार की रात लगभग दो बजे तेज हवा चलने से बरेली मार्ग पर चुर्रासकतपुर के पास यूकेलिप्टस के 10 पेड़ टूट कर सड़क पर गिर गए, जिससे यातायात बाधित हो गया। पुलिस ने शुक्रवार को सुबह उन पेड़ों को हटवाया तब कहीं जाकर यातायात सुचारू हुआ।
इधर, गांव रमभोजा के पास माला नदी का पुल और गांव अमरता खास के पास रपतुआ नदी का पुल बाढ़ के पानी में अब भी डूबे हुए हैं। इन पुलों के ऊपर से पानी बह रहा है। गांव अमृता खास की राजवती का उनकी झोंपड़ी में रखा करीब 20 हजार का सामान बाढ़ के पानी में बह गया।
पहाड़गंज के पूर्व प्रधान शब्बीर अहमद ने बताया कि उनके गांव में अब भी बाढ़ का पानी बह रहा है, लेकिन बरेली, खुदागंज और फरीदपुर मार्ग पर भरा बाढ़ का पानी काफी कम हो जाने से इन मार्गों पर यातायात सुचारू हो गया है, जिससे लोगों ने काफी राहत महसूस की है।
शुक्रवार को इन तीनों मार्गों पर काफी आवागमन रहा। टिकरी से सोंधा गोटिया जाने वाली मार्ग पर अमेडी पुल के पास अब भी काफी पानी भरा हुआ है, जिससे उधर का यातायात पूरी तरह से बंद है।
देवहा, माला, कटना, अमेडी और रपतुआ नदियों का जलस्तर कुछ कम हुआ है, लेकिन इन नदियों के किनारे स्थित गांवों में रहने वाले लोग अब भी काफी सहमे हुए हैं। रास्ते पर काफी पानी भरा होने के कारण पीडब्ल्यूडी की टीम गांव बौनी में पुल के पास टूट गई अप्रोच रोड की मरम्मत करने नहीं पहुंच पाई है। इसकी वजह से शुक्रवार को दूसरे दिन भी उधर के लोगों को आने-जाने में काफी दिक्कत हुई।
मोहल्ला दुबे निवासी सर्वेंद्र शुक्ला की कार पड़ोस में स्थित जर्जर दीवार के ढहने से उसके मलबे में दबकर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। बीसलपुर-पीलीभीत मार्ग से गांव अर्जुनपुर, बीसलपुर-बरेली मार्ग से गांव नवदिया भगत, खुदागंज मार्ग से गांव खांडेपुर, खुदागंज मार्ग से गांव चौखंडी, खुदागंज मार्ग से गांव अहिरवाड़ा, बीसलपुर-पीलीभीत मार्ग से गांव कासिमपुर जाने वाले मार्ग पर अब भी जलभराव है।
गांव जसकर्णपुर के बीच चार फुट बाढ़ का पानी बह रहा है। गांव खनंका के सोलर प्लांट में भी पानी भर गया है जिससे निर्माण कार्य रुक गया है। बाढ़ प्रभावित ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित सरकारी और सहकारी संस्थाएं अब भी बंद हैं।