पीलीभीत। रबी की फसलों में समय से पानी मुहैया कराने के दावों के बीच किसान नहरों के पानी के लिए परेशान हैं। सिल्ट सफाई का समय पूरा होने के बाद भी नहरों में पानी नहीं छोड़ा जा सका है। इससे फसलों को प्रभावित होता देख मजबूरन किसान किराए पर पंपिंग सेट और बिजली के मोटर पंप का सहारा लेकर सिंचाई करने में जुटे हुए हैं।
किसानों का कहना है कि ऐसे में उनपर आर्थिक बोझ बढ़ गया है। जिले की पहचान कृषि बाहुल्य क्षेत्र के रूप में भी होती है। यहां 680 किलोमीटर की लंबाई में फैली नहरों, सहायक नहरों और माइनरों से करीब एक लाख से ज्यादा किसानों की फसलों के लिए पानी मुहैया कराया जाता है।
इन नहरों की जिम्मेदारी सिंचाई विभाग के पांच उपखंडों के अधीन है। रबी की फसलों के लिए पानी की मांग अधिक रहती है। किसानों को समय से पानी मिल जाए, इसके लिए करोड़ों रुपये खर्च कर हर साल नहरों और माइनर की सफाई कराई जाती है, लेकिन अफसरों की उदासीनता के चलते किसानों को समय से पानी नहीं मिल पा रहा है।
किसानों का कहना है कि शासन 15 नवंबर तक पानी मुहैया कराने पर जोर देता है, लेकिन दिसंबर के 10 दिन बीतने के बाद भी नहरें सूखी हैं। ऐसे में रबी की फसलों में प्रमुख गेहूं की फसल में पानी की आवश्यकता अधिक है। ऐसे में फसलों के प्रभावित होने का डर सताने लगा है। मजबूर होकर पंपिंग सेट और मोटर आदि से सिंचाई करनी शुरू कर दी है। किसानों को बेवजह आर्थिक बोझ झेलना पड़ रहा है। बता दें कि जनपद में छोटी बढ़ी करीब पचास नहरें, सहायक नहरें और माइनर हैं।
छोटे किसानों को अधिक हो रही परेशानी
जिले में हजारों किसान ऐसे भी हैं, जिन्हें फसलों में सिंचाई के लिए सिर्फ नहरों का सहारा है। इसमें कलीनगर तहसील क्षेत्र के नवदिया टोंडर, नवदिया घनेश, केसरपुर, लोधीपुर, बराही, कीरतपुर, अर्जुनपुर, लौकाही, अमृतपुर, बिहारीपुर, डगा आदि गांवों में करीब 20 हजार से ज्यादा किसान सिंचाई के लिए सिर्फ नहरों पर ही निर्भर हैं। यहां न खेतों में पंपिंग सेट हैं और न ही बिजली की व्यवस्था। जिले की हरदोई ब्रांच, खीरी ब्रांच, पूरनपुर रजवाह, माधोटांडा रजवाह नहरें व सहायक नहरों से ही यह किसान फसलों की सिंचाई करते हैं।
पंपिंग सेट से प्रति एकड़ खर्च हो रहे 14-15 सौ रुपये
किसानों का कहना है कि पंपिंग सेट से सिंचाई करने पर खर्च दोगुना हो जाता है। एक एकड़ पर करीब सात सौ रुपये का डीजल खर्च होता है। इसके अलावा चार सौ रुपये पंपिंग सेट का किराया, 300 रुपये मजदूर के खर्च होते हैं। इस तरह करीब 14-15 सौ रुपये एक एकड़ फसल की सिंचाई पर कम से कम खर्च होते हैं।
नहरों में सिंचाई के लिए कभी भी समय से पानी नहीं मिलता। निजी खर्च से पानी लगाने पर मजबूर हैं। सफाई भी ठीक से नहीं होती। किसानों को हर समय परेशान होना पड़ता है। - जमुना प्रसाद, बांसखेड़ा
हरदोई ब्रांच नहर समेत अन्य सहायक नहरों में पानी न छोड़े जाने से किसानों की गेहूं की फसल की पहली सिंचाई लेट हो रही है। सिंचाई विभाग के अफसर लापरवाह रवैया अपनाएं हुए हैं। - मंजीत सिंह, जिलाध्यक्ष, भारतीय किसान यूनियन (अराजनीतिक)
बाढ़ में क्षतिग्रस्त शारदा मुख्य नहर की मरम्मत का हवाला दे रहे अफसर
सिंचाई विभाग के शारदा सागर खंड के अधिशासी अभियंता ब्रजेश पोरवाल का कहना है कि सिल्ट सफाई का कार्य पूरा हो चुका है। बाढ़ के दौरान शारदा मुख्य नहर कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त हो गई थी। अन्य नहरों भी प्रभावित हुईं थी। जिनपर मरम्मत कार्य कराया जा रहा है। जो अंतिम चरण में हैं। शीघ्र ही नहरों में पानी छोड़ दिया जाएगा।