पीलीभीत। जंगल से सटे गांवों में मानव-बाघ संघर्ष रोकने के लिए शुरू की गई पीलीभीत टाइगर रिजर्व की बाघ एक्सप्रेस अब अक्तूबर से शिक्षा के मंदिरों तक पहुंचेगी। गांवों में जागरूकता अभियान के बाद अब स्कूली बच्चों को वन्यजीवों के व्यवहार और उनसे सुरक्षित दूरी बनाए रखने का पाठ पढ़ाने की तैयारी है। इसके लिए बेसिक शिक्षा विभाग ने अमरिया, मरौरी और ललौरीखेड़ा ब्लॉक के 120 शिक्षक-शिक्षिकाओं की सूची पीटीआर प्रशासन को सौंप दी है। इन शिक्षकों को मास्टर ट्रेनर के तौर पर प्रशिक्षित किया जाएगा।
प्रशिक्षण के बाद शिक्षक अपने-अपने विद्यालयों में बच्चों को बताएंगे कि जंगल और खेतों के बीच वन्यजीवों की मौजूदगी में किस तरह सावधानी बरती जाए। बाघ या तेंदुआ दिखाई देने पर क्या करें और किन परिस्थितियों में वन्यजीव के करीब जाने से बचना चाहिए, इसकी भी जानकारी दी जाएगी।
पीटीआर ने नवंबर 2024 में मानव-बाघ सहअस्तित्व जागरूकता अभियान शुरू किया था। इसके तहत बाघ एक्सप्रेस को 72 संवेदनशील गांवों तक पहुंचाया गया। ग्रामीणों को वन्यजीवों के व्यवहार, उनके आने के संकेत और आमना-सामना होने पर बरती जाने वाली सावधानियों की जानकारी दी गई।
बेसिक शिक्षा विभाग ने अमरिया, मरौरी और ललौरीखेड़ा से 40-40 शिक्षक-शिक्षिकाओं का चयन किया है। कुल 120 शिक्षक पीटीआर की विशेषज्ञ टीम से विशेष प्रशिक्षण लेंगे। यही शिक्षक आगे अपने विद्यालयों में मास्टर ट्रेनर की भूमिका निभाएंगे। डीएफओ मनीष सिंह ने बताया कि मानव-बाघ सहअस्तित्व अभियान के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। संवेदनशील गांवों में जागरूकता बढ़ने से जनहानि पर काफी हद तक रोक लगी है।