पीलीभीत। ट्रैंक्युलाइज करने के बाद बाघ की मौत के मामले में शासन से आई उच्चस्तरीय टीम ने घटनास्थल की गहनता से पड़ताल की। इसके बाद जांच टीम ने बाघ पकड़ने के अभियान में लगे अधिकारियों और कर्मचारियों के भी बयान दर्ज किए।
जराकोठी क्षेत्र में शिवनगर लिंक मार्ग पर तीन ग्रामीणों को हमला करने वाले बाघ को टाइगर रिजर्व की टीम ने रविवार शाम को ट्रैंक्युलाइज किया था। कुछ देर बाद ही बाघ की मौत हो गई थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक पुरानी चोटों के कारण बाघ की मौत हुई। वहीं कुछ वन्यजीव प्रेमियों ने अधिकारियों को कटघरे में कर दिया था। इस मामले की शिकायत शासन में भी की गई थी। शासन ने बाघ की मौत के मामले में अपर प्रमुख वन संरक्षक (प्रोजेक्ट टाइगर) वीके शर्मा की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय टीम का गठन किया है। जांच टीम में मुख्य वन संरक्षक रमेश पांडेय और कानपुर चिड़ियाघर के पशु चिकित्सक डॉ. आरके सिंह भी शामिल हैं। बुधवार को लखनऊ से आई तीन सदस्यीय जांच टीम ने जरा क्षेत्र में पहुंचकर बाघ के हमला करने वाले स्थान, ट्रैंक्युलाइज करने वाली जगह पर पहुंचकर गहनता से उसकी जांच की। अपर प्रमुख वन संरक्षक ने हाल में ही शिकारियों द्वारा की गई घटनाओं के बारे में भी टाइगर रिजर्व अफसरों से जानकारी हासिल की। इसके बाद टीम ने गढ़ा रेंज के गेस्टहाउस में पहुंचकर बाघ पकड़ने के अभियान में शामिल हुए अधिकारियों, कर्मचारियों के भी बयान दर्ज किए। अधिकारियों के मुताबिक तीन सदस्यीय टीम रात में यहीं विश्राम करेगी।
शासन से एक उच्चस्तरीय टीम ने यहां आकर बाघ की मौत के मामले की जांच शुरू की है। अधिकारियों और कर्मचारियों के बयान लिए गए हैं। टीम बाघ के हमले में घायल लोगों की भी जांच करेगी। -नवीन खंडेलवाल, डिप्टी डायरेक्टर, टाइगर रिजर्व