पीलीभीत। अपर सत्र न्यायाधीश महेंद्र श्रीवास्तव कोर्ट संख्या-1 ने प्रतिबंधित पशु को मारने के मामले में दोषी पाए गए कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला मुनीर खां निवासी इशरार को तीन वर्ष के कठोर कारावास और तीन लाख अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड अदा न करने पर दोषी को अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
अभियोजन के अनुसार, 24 मई 2023 को कोतवाली पुलिस को सूचना मिली थी कि मोहल्ला मुनीर खां स्थित एक मकान में प्रतिबंधित पशु को मारा जा रहा है। सूचना पर पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर छापा मारा तो एक व्यक्ति मांस काटते हुए पकड़ा गया, जबकि उसके तीन साथी मौके से भाग गए। पुलिस ने मौके से करीब 40 किलोग्राम गोमांस, पशु को मारने में प्रयुक्त छुरी, चापड़, इलेक्ट्रॉनिक तराजू व अन्य सामान बरामद किया था।
पशु चिकित्साधिकारी की जांच में बरामद मांस प्रथम दृष्ट्या प्रतिबंधित पशु का पाया गया। इसके बाद पुलिस ने आरोपी के विरुद्ध उत्तर प्रदेश गोहत्या निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल किया। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने पुलिसकर्मियों, पशु चिकित्साधिकारी और विवेचक सहित कई गवाहों के बयान व दस्तावेजी साक्ष्य न्यायालय में प्रस्तुत किए। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद न्यायालय ने आरोपी इशरार को दोषी करार देते हुए तीन वर्ष के कठोर कारावास एवं अर्थदंड से दंडित किया। वहीं, भागे आरोपितों के संबंध में विधिक कार्रवाई अलग से जारी है। संवाद
आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोपी की अग्रिम जमानत खारिज
पीलीभीत। आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका अपर सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश (ईसी एक्ट) शिखा प्रधान ने मामले की गंभीरता को देखते हुए निरस्त कर दी।
अभियोजन के अनुसार, थाना दियोरिया कला क्षेत्र के एक व्यक्ति ने रिपोर्ट दर्ज कराई कि उनकी नाबालिग पुत्री गांव में अपनी नानी के घर रहकर पढ़ाई कर रही थी। नानी का कोई पुत्र नहीं था। 28 मई 2026 की रात उसकी पुत्री ने आत्महत्या कर ली। ग्रामीणों और रिश्तेदारों के कहने पर उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया।
रिपोर्ट के मुताबिक, घटना के तीसरे दिन जब परिजनों ने मृतका का मोबाइल फोन फोन देखा तो पता चला कि युवक करन सिंह, जो देहरादून में नौकरी करता है, से प्रेम-प्रसंग था। साथ ही वह विद्यालय आने-जाने के दौरान ई-रिक्शा चालक आदित्य राठौर से भी बातचीत करती थी। आरोप है कि घटना से कुछ दिन पहले करन सिंह और आदित्य राठौर के बीच बातचीत को लेकर मनमुटाव हो गया था, जिसके बाद मृतका ने दोनों से बातचीत बंद कर दी थी। वादी का आरोप है कि दोनों युवकों ने उसकी पुत्री को प्रेमजाल में फंसाया, जिससे बदनामी के डर से उसने आत्महत्या कर ली।
पुलिस ने तहरीर के आधार पर मामला दर्ज कर विवेचना शुरू की। मामले में आरोपी करन सिंह की ओर से अग्रिम जमानत याचिका दाखिल की गई। न्यायालय ने मामले को गंभीर प्रकृति का मानते हुए आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका निरस्त कर दी। संवाद
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ऑनलाइन गेमिंग एप से 35 लाख की साइबर ठगी में महिला की अग्रिम जमानत खारिज
पीलीभीत। ऑनलाइन गेमिंग एप के जरिये 35 लाख रुपये की साइबर ठगी के मामले में अपर सत्र न्यायाधीश/ विशेष न्यायाधीश (ईसी एक्ट) शिखा प्रधान ने बरेली निवासी एक महिला की अग्रिम जमानत अर्जी खारिज कर दी। न्यायालय ने मामले को गंभीर प्रकृति का मानते हुए राहत देने से इन्कार कर दिया।
अभियोजन के अनुसार, थाना कोतवाली क्षेत्र की आवास विकास कॉलोनी निवासी शिवानी ने साइबर अपराध थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। वह उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक, सुनगढ़ी में बैंक मित्र के पद पर कार्यरत हैं। शिकायत में बताया गया कि 28 जनवरी 2025 को उसके मौसी के बेटे अनमोल जायसवाल ने उसे एक गेमिंग एप के माध्यम से रुपये लगाकर अधिक कमाई होने का झांसा दिया। उसकी बातों में आकर उसने गूगल पर वेबसाइट खोजकर ईमेल आईडी बनाई और 28 जनवरी से 30 नवंबर 2025 तक एप पर रुपये लगाकर गेम खेलती रही।
शिकायत के अनुसार, गेम में 300 रुपये से लेकर 25 हजार रुपये तक की रकम लगाई जाती थी और कई गुना लाभ का लालच दिया जाता था। इस दौरान उसने अपने एसबीआई और उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक खातों से करीब 35 लाख रुपये निवेश कर दिए, जिनमें कुछ रकम खाताधारकों की भी थी। बाद में पता चला कि एप संचालकों ने धोखाधड़ी कर पूरी रकम हड़प ली। आरोप है कि अनमोल जायसवाल उसे इस जाल में फंसाने के बाद अब न तो फोन उठा रहा है और न ही संपर्क में है।
मामले में बरेली के आरए बाजार, तोपखाना निवासी ममता ने अग्रिम जमानत याचिका दाखिल की थी। न्यायालय ने मामले को गंभीर प्रकृति का मानते हुए अग्रिम जमानत याचिका निरस्त कर दी। संवाद