पीलीभीत। सर्दी का सितम शुरू हो गया है लेकिन अभी तक तीन करोड़ रुपये की लागत से केजीएन कॉलोनी में बना सरकारी आश्रय स्थल संचालित नहीं हो सका है। अधिकतर कक्षों पर ताले लगे हैं। जबकि, बेघर लोग सड़क के किनारे आसरा बनाकर रहने को मजबूर हैं।
आश्रय स्थल में 100 गरीबों के लिए बेड समेत कक्ष उपलब्ध हैं। अगर कोई आता है तो उसे ठहराया जाना है लेकिन आश्रय स्थल के बारे में नगरपालिका परिषद की ओर से कोई प्रचार-प्रसार नहीं कराया गया है। रोडवेज और रेलवे कॉलोनी में ऐसा कोई बैनर पोस्टर नहीं लगा है जिससे जरूरतमंद व्यक्ति आश्रय स्थल तक पहुंच सके। आश्रय स्थल की लोकेशन भी ऐसी नहीं है कि आम आदमी वहां तक पहुंच सके। केजीएन कॉलोनी रेलवे स्टेशन और बस स्टेशन के करीब दो किलोमीटर की दूरी पर है। वहां तक पहुंचने के लिए जरूरतमंद के लिए आसान नहीं है। जब यह सवाल नगरपालिका परिषद के अधिशासी अधिकारी के सामने उठाया गया तो उनका कहना था कि वे जल्दी ही रेलवे स्टेशन और रोडवेज पर फ्लेक्सी लगवा देंगे ताकि वहां तक लोग आसानी से पहुंच सके। अगर रेलवे स्टेशन के बाहर लोग सड़क किनारे रहने लगे हैं तो उसे भी देखेंगे।
रेलवे स्टेशन के बाहर सड़क किनारे शरण लिए हैं कई परिवार
ऐसा नहीं है कि अधिकारियों और कर्मचारियों की नजर न पड़ती हो लेकिन सब देखकर बेखबर बने हुए हैं। यही वजह है कि रेलवे स्टेशन के बाहर तीन परिवार सड़क के किनारे अपना ठिकाना बनाए हुए हैं। आसपास के दुकानदारों ने बताया कि यह खुले में शौच के लिए जाते हैं। बारिश होती है तो दुकानों के बाहर बरामदे में या फिर रेलवे स्टेशन के अंदर शरण लेते हैं। जबकि शेल्टर होम ऐसे ही बेघर लोगों की परेशानी को देखते हुए बनाए गए थे।
अस्थायी रैन बसेरा नहीं बनवाएगी पालिका
अबकी बार अस्थायी रैन बसेरा बनवाए जाने का इरादा नगर पालिका परिषद नहीं है। पालिका के ईओ सुरेंद्र प्रताप सिंह का कहना है कि 100 बेड का शेल्टर होम बना है। इसे सर्दी के सीजन में रैन-बसेरे की तरह इस्तेमाल किया जाएगा। सामान्य दिनों में भी जरूरतमंद लोग इसका इस्तेमाल कर सकेंगे। उन्होंने बताया कि 35 बिस्तर मंगा लिए है। इसमें महिला और पुलिस के लिए अलग-अलग कक्ष उपलब्ध हैं।
शेल्टर होम की सेवाएं चाहिए तो इन नंबरों को डायल कीजिए
9457664819 अधिशासी अधिकारी
आश्रय स्थल एनजीओ को संचालित करना है। निदेशालय स्तर से जिस एनजीओ का चयन किया किया गया है उसने व्यवस्था को अपने हाथ में नहीं लिया है। इसलिए नगरपालिका परिषद इसे खुद संचालित कर रही है। बेघर लोग इसमें आए नहीं है। यह आश्रय स्थल उन लोगों के लिए है जो किसी काम की वजह से शहर में आए और ठहरने के लिए होटल धर्मशाला आदि का खर्च नहीं कर सकते हैं। या फिर रोजाना काम करने के लिए शहर आने वाले लोग भी जरूरत पर यहां ठहर सकते हैं उन्हें बिस्तर समेत निशुल्क ठहरने की व्यवस्था की गई है। बेघर भी यहां पर कुछ दिन तक ठहर सकते हैं। किसी के लिए शेल्टर होम को स्थायी निवास बनाने का प्रावधान नहीं है।
- सुरेंद्र प्रताप सिंह, अधिशासी अधिकारी, नगर पालिका परिषद