बांसुरी महोत्सव में चल रहे कार्यक्रमों का आनंद लेते बच्चे। संवाद
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पीलीभीत। आंखों को मूंद लेने से खतरा न जाएगा, वो देखना पड़ेगा जो देखा न जाएगा, जलना है कब्र पर कि जलाना है बज्म में, यह भी किसी चराग से पूछा न जाएगा। ड्रमंड राजकीय इंटर कॉलेज परिसर में चल रहे बांसुरी महोत्सव के समापन के मौके पर आयोजित कवि सम्मेलन में मशहूर शायर प्रोफेसर वसीम बरेलवी ने अपने कलामों से समा बांध दिया। वहीं अन्य शायरों के कलामों पर जमकर तालियां गूंजी। वहीं एक साथ सौ बांसुरी वादकों ने एक साथ अपनी प्रस्तुति दी।
शायर वसीम बरेलवी ने आगे कलाम पढ़ा, बात बढ़ जाती तो खोटा होता दोनों का सफर, मैं ही पीछे हट गया और उसको रस्ता दे दिया। उनके अलावा शायर अरुण जैमिनी, मध्यम सक्सेना, जीतेश राज, रुचि चतुर्वेदी, एकता भारती, अमन अक्षर और शायर सिद्धार्थ ने भी अपने कलामों से महफिल को सर्द रात में भी जोश भर दिया। बड़ी संख्या में पहुंचे दर्शकों ने भी कवि सम्मेलन का जमकर लुत्फ उठाया। वहीं शाम को हुए सौ बांसुरी वादन के कार्यक्रम ने भी लोगों के मन को जीत लिया। इसके अलावा दिन में भी कई गीत संगीत और सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए। विभिन्न स्टालों पर भीड़ जुटी रही।
पुष्प प्रदर्शनी ने भी मन मोहा
उद्यान विभाग की तरफ से पुष्प प्रदर्शनी का आयोजन किया गया है। इसमें पंद्रह प्रकार के पौधे थे। रुद्राक्ष, गुलाब, गेंदा, लिलि आदि थे। शहर के कई लोगों ने इसमें प्रतिभाग किया। जज की भूमिका महिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. अनीता चौरसिया ने निभाई। उद्यान अधिकारी रमेश चंद्र राना भी मौजूद रहे। विजेताओं को पुरस्कार प्रदान किए गए।