पीलीभीत। माधोटांडा क्षेत्र के पुरैना गांव की महिलाओं ने मेहनत, हौसले और सहयोग की ताकत से एक नई मिसाल पेश की है। पीलीभीत टाइगर रिजर्व (पीटीआर) और डब्ल्यूडब्ल्यूएफ की संयुक्त पहल से शुरू हुआ शहद उत्पादन अब महिलाओं की आजीविका का मजबूत जरिया बन चुका है। गांव की महिलाएं न सिर्फ शहद खरीदकर उसकी पैकिंग कर रही हैं, बल्कि “तराई हनी” ब्रांड के नाम से उसे जनपद से लेकर बाहर तक बेच रही हैं।
माधोटांडा क्षेत्र के पीटीआर की बराही रेंज से सटे पुरैना गांव में महिलाओं ने आत्मनिर्भरता की एक नई कहानी लिख दी है। वर्ष 2023 में शुरू हुई यह पहल अब ग्रामीण विकास और महिला सशक्तीकरण का प्रतीक बन चुकी है। डब्ल्यूडब्ल्यूएफ और पीलीभीत टाइगर रिजर्व (पीटीआर) के सहयोग से गांव के करीब 30 पुरुषों को शहद उत्पादन का प्रशिक्षण दिया गया।
इन पुरुषों द्वारा तैयार शहद को अब गांव की महिलाओं का समूह खरीदता है। महिलाएं शहद की गुणवत्ता जांचने, पैकिंग और विपणन की जिम्मेदारी खुद संभाल रही हैं। उन्होंने अपने उत्पाद को “तराई हनी” नाम से बाजार में पहचान दी है। यह शहद न केवल जनपद पीलीभीत में बल्कि अन्य जिलों में भी बड़ी मात्रा में बिक रहा है। गांव की महिलाएं बताती हैं कि पहले घरों तक सीमित रहने के कारण वे आर्थिक रूप से निर्भर थीं, लेकिन अब शहद उत्पादन और बिक्री से उनकी पहचान और आमदनी दोनों बढ़ी हैं। संवाद
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50 से 500 ग्राम तक की पैकिंग करने पर जोर
माधोटांडा क्षेत्र के पीटीआर बराही रेंज से सटे पुरैना गांव की महिलाओं द्वारा तैयार किया जा रहा “तराई हनी” अब बाजार में तेजी से पहचान बना रहा है।
पीटीआर और डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के सहयोग से चल रहे इस प्रोजेक्ट में गांव के करीब 30 पुरुष शहद उत्पादन कर रहे हैं, जबकि महिलाएं उसकी खरीद, पैकिंग और बिक्री का कार्य संभाल रही हैं। समिति से जुड़े हर्षित मंडल के अनुसार अभी 50 ग्राम से लेकर 500 ग्राम तक की पैकिंग की जा रही है। 50 ग्राम 30 रुपये, जबकि
500 ग्राम वजन में तीन सौ रुपये तक बिक्री की जा रही है। 100 और 200 ग्राम की पैकिंग भी की जा रही है। शहद की क्वालिटी और स्वाद के कारण इसकी मांग लगातार बढ़ रही है।
हम अब किसी पर निर्भर नहीं हैं। अपने हाथों से तैयार शहद बेचकर न सिर्फ घर चला रहे हैं, बल्कि परिवार की मदद भी कर पा रहे हैं। - पपिया सरकार
शहद के उत्पादन ने स्थाई रोजगार से जोड़ा है। समूह की मदद से शहद को पैक कर बिक्री करने पर जोर दिया जा रहा है। इससे आमदनी भी हो रही है। - दिपाली मंडल
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सरकार से जारी हुआ लाइसेंस, कई कंपनियों से साधा संपर्क
- डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के वरिष्ठ परियोजना अधिकारी नरेश कुमार के अनुसार जिले में शहद उत्पादन को लेकर बढ़ावा दिया जा रहा है। वर्तमान में तीन गांव में इस पहल को किया जा रहा है। इसमें पुरैना से शुरुआत के बाद अब टांडा छत्रपति और रम्पुरिया मोहन में भी शहर का उत्पादन हो रहा है, लेकिन कलेक्शन के बाद शहद को पैकिंग के लिए पुरैना गांव ही लाया जाता हैं। जहां समूह की महिलाएं पैकिंग कर इसको बिक्री के लिए आगे भेज रही हैं। शहद को बढ़ावा देने के लिए पीटीआर के पर्यटन के दौरान भी शहद काउंटर बनाया गया है। इस पहल से काफी लोगों को आजीविका का साधन मिला है।
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वर्जन
यह पहल ग्रामीण समुदाय में सतत आजीविका और वन्यजीव संरक्षण दोनों को साथ लेकर चल रही है। आने वाले समय में इस प्रोजेक्ट से और गांवों के लोगों को जोड़े जाने की योजना है। - मनीष सिंह, डीएफओ पीटीआर