पीलीभीत। शहर का दायरा बढ़ता जा रहा है। चारों ओर कॉलोनी बढ़ रहीं है। इसके बाद भी नगरपालिका का क्षेत्र नहीं बढ़ रहा है। लोग शहर में तो बस गए, मगर शहर की सुविधाओं से वंचित हैं। माधोटांडा रोड किनारे 15 साल पहले देशनगर बाहर चुंगी नाम से कॉलोनी बसना शुरू हुई थी। अब तक करीब ढाई सौ से अधिक घर बन चुके हैं। इसके बाद भी इस कॉलोनी को नगरपालिका में शामिल नहीं किया गया। लोग खुद ही पानी के निकास और साफ-सफाई की बंदोबस्त करते हैं।
शहर में 32 हजार से अधिक घर हैं और आबादी की बात करें, तो डेढ़ लाख ऊपर नगरपालिका के अनुसार बताई जा रही है। इसके अलावा शहर के चारों ओर बसी कॉलोनियों को अभी तक नगरपालिका में शामिल नहीं किया गया है। साफ सफाई से लेकर विद्युत व्यवस्था तक दुरुस्त नहीं है। लोग सिर्फ नाम को शहर में रह रहे, मगर सुविधा गांव से भी बदतर है।
बीस मीटर की दूसरी में है शहर और देहात का अंतर
माधोटांडा रोड किनारे बसी देशनगर बाहर चुंगी कॉलोनी और शहर की निरंजनकुंज कॉलोनी में महज टनकपुर रेलवे ट्रैक बीच में है। इससे बीस मीटर के अंतराल में नगरपालिका और ग्राम पंचायत का फेर है। लोगों का कहना है कि कॉलोनी में प्लांट खरीदते समय नगरपालिका में शामिल होने की बात कहीं गई। प्लांट भी शहर की कॉलोनी के नाम से रजिस्ट्री कराई गई। मगर अभी तक शहर की कोई सुविधा नहीं मिली है।
ग्राम प्रधान की भी इस कॉलोनी की ओर नहीं है ध्यान
गांव खपरैल गौटिया के निकट होने के कारण यहां के वाशिंदे चुनाव के दौरान ग्राम पंचायत में वोट देते है। शामिल भी इस कॉलोनी को ग्राम पंचायत में किया गया। इसके बाद भी ग्राम प्रधान कॉलोनी की सड़क और पानी निकास की ओर ध्यान नहीं देते। इससे बारिश के दिनों में निकलना दूभर हो जाता है। शहर और गांव के बीच में कॉलोनी वाले फंसकर रह गए हैं।
लगातार शहर बढ़ता जा रहा है। मगर नगरपालिका का इस ओर कोई ध्यान नहीं है। शहर में मकान बनाने को लेकर चार साल पहले प्लांट खरीद कर बनवाया था। मगर सुविधा गांव की भी नहीं मिल रहीं। - जय सिंह, कॉलोनीवासी
कॉलोनी में ढाई सौ से अधिक घर हैं और एक हजार से ऊपर आबादी है। इसके बाद भी कॉलोनी के मुख्य रास्ते कच्चे है। शहर की कॉलोनी के नाम से प्लांट की रजिस्ट्री कराई, मगर सुविधा गांव से भी बदतर है। - करन गंगवार, कॉलोनीवासी
कॉलोनी में कूड़े उठाने की समस्या बनी रहती है। खुद ही कॉलोनी के बाहर जाकर फेंकना पड़ता है। बीस मीटर की दूरी पर शहर है। इसके बाद भी कॉलोनी को शामिल नहीं किया जा रहा है। गांव की सुविधाएं भी नहीं मिल पा रही हैं। इससे काफी दिक्कत होती है। - कमलेश कुमारी, कॉलोनीवासी
दस साल पहले कॉलोनी में घर बनवाया था। बिजली, पानी, कूड़े की मुख्य समस्या है। सफाई कर्मी भी कोई नहीं आता। कई बार ग्राम प्रधान से नालों की सफाई के लिए कहा, मगर ध्यान नहीं दिया जाता। शहर में रहने के बाद भी कॉलोनी की ओर ध्यान नहीं है। - पुष्पारानी, कॉलोनीवासी