इल्हाम शम्सी और उसकी पत्नी की संपत्ति की होगी जांच
रिपोर्ट दर्ज होने के बाद प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए आरोपी कर्मचारी और उसकी पत्नी की चल-अचल संपत्ति की जांच के निर्देश दिए हैं। बताया जाता है कि इल्हाम शम्सी का रहन-सहन काफी लग्जरी था। वह महंगे मोबाइल फोन और कई लग्जरी कारों का शौकीन बताया जा रहा है। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटेंगी कि उसकी घोषित आय और संपत्ति के बीच कितना अंतर है।
जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह के निर्देश पर न केवल एफआईआर दर्ज की गई है। बल्कि जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय से जुड़े सभी आहरण-वितरण को भुगतान से संबंधित बिलों का गहन परीक्षण करने के आदेश भी दिए गए हैं। डीएम ने स्पष्ट किया है कि जांच के दौरान यदि किसी भी स्तर पर अनियमितता पाई जाती है तो संबंधित अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ विधिक कार्रवाई की जाएगी। इस आदेश के बाद विभागीय अधिकारियों में खलबली मची हुई है। प्रशासनिक हलकों में यह भी चर्चा है कि संपत्ति जांच और भुगतान बिलों की पड़ताल से इस पूरे लेनदेन नेटवर्क के अन्य चेहरे भी सामने आ सकते हैं।
वर्षों से वेतन, बिल, टोकन आदि का कार्य देखता था निलंबित कर्मचारी
निलंबित कर्मचारी अपने बीसलपुर के जनता टेक्निकल कॉलेज में अपने मूल तैनाती के बजाय कार्यालय से संबद्ध था। डीआईओएस राजीव कुमार ने बताया कि कर्मचारी कार्यालय में वेतन, बिल, टोकन, जनरेशन आदि का कार्य देख रहा था। कर्मचारी फर्जी और कूटरचित तरीके से अपने और पत्नी के खाते में वेतन मद से गलत तरीके से बनाकर एवं तत्कालीन डीआईओएस को अंधकार में रखकर स्वीकृत कराकर वर्ष 2024 से 98 ट्रांजेक्शन के द्वारा 1.01 करोड़ की धनराशि अपनी पत्नी के खाते में कोषागार के माध्यम से एनईएफटी के द्वारा लेनदेन किया और अधिकारियों को अंधकार में रखकर हस्ताक्षर कराए गए हैं, जो सरकारी संपत्ति के गबन से संबंधित है।
अधिकारियों-कर्मचारियों पर कार्रवाई न होने से उठे सवाल
चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के 1.01 करोड़ की सरकारी धनराशि का निजी खातों में लेनदेन में डीआईओएस से लेकर बाबुओं तक की संलिप्तता पाई गई थी। निलंबित कर्मचारी ने एक साल तक विभिन्न मदों की धनराशि को अपने खातों में भेजा। उन खातों का अलग-अलग लिपिकों का कोड बना हुआ है। रुपये को भेजने में उनकी अनुमति भी लेनी पड़ती है। इसके अलावा डीआईओएस की संस्तुति के बिना भी धनराशि का ट्रांजेक्शन संभव नहीं है।
वहीं, कोषागार के संबंधित कर्मचारी भी बिना देख बड़ी रकम को भेजने में संस्तुति करते रहे, लेकिन सख्ती के बाद निलंबन के बाद कर्मचारी और उसकी पत्नी को एफआईआर में नामजद किया गया, लेकिन अन्य कर्मचारियों और अधिकारियों पर न तो अभी तक कोई कार्रवाई हुई न ही एफआईआर में उन्हें नामजद किया गया।