पीलीभीत। पीटीआर में वन्यजीवों की सुरक्षा को बेहतर करने के साथ जंगल से सटे गांवों के लोगों को नवाचार से जोड़ने के लिए एमथ्रीएम संस्था की ओर से प्रयास तेज किए गए हैं। इसके लिए ग्रामीण इलाकों के लोगों को जागरूक करने के साथ रोजगार से जोड़ने पर भी जोर दिया जा रहा है।
पीलीभीत टाइगर रिजर्व में बाघों की दुनिया निराली है। इसके पीछे जंगल का अनुकूल वातावरण अहम माना जाता है। टाइगर रिजर्व का दर्जा मिलने के बाद बाघों की संख्या 20 से बढ़कर 72 तक पहुंच गई है। दो साल पूर्व आए आंकड़ों के बाद संख्या और बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।
संख्या बढ़ने के साथ पीटीआर के पर्यटन को नई पहचान मिलने लगी है। इससे जंगल से सटे लोगों को रोजगार के अवसर भी मिलने लगे हैं तो होम स्टे भी तेजी के साथ विकसित किए जाने लगे हैं। इसके साथ-साथ मानव वन्यजीव संघर्ष भी चुनौती बनने लगा है। पूर्व में कई घटनाएं भी सामने आईं। कई बार रोष भी देखने को मिला।
इधर वन और वन्यजीवों की सुरक्षा के साथ पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ ग्रामीणों को भी नवाचार से जोड़ने पर जोर दिया जाने लगा। इसके लिए एमथ्रीएम संस्था आगे आई है। सितंबर माह में पीटीआर प्रशासन के साथ तीन साल के लिए समझौता पत्र पर हस्ताक्षर हुए थे, इसके बाद से संस्था की ओर से प्रयास तेज कर दिए गए हैं।
जंगल से सटे संवेदनशील गांवों में सुरक्षा बिंदुओं पर जोर देने के साथ ग्रामीणों को जागरूक करने के लिए नुक्कड़ नाटक शुरू किए गए हैं। अब संस्था की ओर से ग्रामीणों को रोजगार मुहैया कराने पर भी जोर दिया जा रहा है। इसके लिए पूर्व में मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं से जुड़े परिवारों को प्राथमिकता देने पर विचार किया जा रहा है।
डीएफओ मनीष सिंह ने बताया कि जंगल से सटे गांवों के लोगों को वन्यजीवों के प्रति जागरूक करने पर जोर दिया जा रहा है। इसके लिए रूपरेखा तैयार की जा रही है।
खेती का तरीका बदलने पर भी दिया जा रहा जोर
जंगल से सटे गांवों में मानव वन्यजीव संघर्ष को रोकने के लिए खेती के तरीके को भी बदलने पर जोर दिया जा रहा है। इसके लिए विभाग की ओर से प्रगतिशील किसानों की सूची बनाकर जागरूकता कार्यक्रम करने की योजना है। जिसमें गन्ने के स्थान पर बांस और केले की खेती पर भी जोर देने की बात कही जा रही है। इसके लिए गन्ने की खेती को भी गैप कर करने की प्रक्रिया पर अमल कराने के प्रयास हैं।