अंतिम संस्कार में महिलाएं भी हुई शामिल
शहर की एक बेटी ने परपंराओं से हटकर अपनी मां की चिता को मुखाग्रि दी। दरअसल, महिला के पति की काफी समय पहले ही मृत्यु हो चुकी है और उनके कोई बेटा है नहीं। यह दृश्य देखकर अंतिम संस्कार में मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं।
उपाधि महाविद्यालय के पूर्व प्रवक्ता, बल्लभनगर कॉलोनी निवासी स्वर्गीय डॉ. सिद्धेश्वर उपाध्याय की पत्नी सरोजनी उपाध्याय का सोमवार शाम निधन हो गया था। वह 72 साल की थीं। सरोजनी स्पाइनल इंजरी के चलते डेढ़ दशक से बिस्तर पर ही थीं। वह अपने पीछे एक विवाहित पुत्री डॉ. अर्चना उपाध्याय और अविवाहित पुत्री डॉ. अपर्णा उपाध्याय को छोड़ गई हैं। उनके कोई पुत्र नहीं था इसलिए मंगलवार सुबह जब अंतिम संस्कार की तैयारी हुई तो लोग मुखाग्नि कौन देगा, इस पर चर्चा करने लगे। इसी बीच उनकी बड़ी बेटी डॉ. अर्चना ने आगे आकर कहा कि मां की उनकी छोटी बेटी डॉ. अर्पणा मुखाग्रि देगी। इसके बाद सरोजनी उपाध्याय के पार्थिव शरीर को मुक्ति धाम ले जाया गया। पुरुषों के साथ महिलाएं भी अंतिम यात्रा में शामिल हुईं। मुक्तिधाम पर उनकी पुत्री डॉ. अपर्णा ने अंतिम संस्कार की सारी रस्में पूरी कर मां को मुखाग्नि दी। अंतिम यात्रा में उनके दामाद राजीव त्रिपाठी, विश्वमित्र टंडन, समाजसेवी सतीश जायसवाल, अमिताभ त्रिपाठी, डॉ. जयप्रकाश, संजय सिंह, अजय गोयल, डॉ. एसके शर्मा, डॉ. एचआर कांडपाल, पूर्व विधायक वीके गुप्ता, प्रदीप नवरंग, प्राचार्य डॉ. प्रमोद सिंह डॉ. रचना, डॉ. लता पांडेय, कुसुम आदि शामिल हुईं।