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Pilibhit News: नोटिस जारी कर ठंडे बस्ते में डाल दिया था मामला, अब मची खलबली

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पीलीभीत। बीसलपुर-शाहजहांपुर हाईवे के लिए भूमि अधिग्रहण से पहले दलालों व पेशेवर खरीदारों की सांठगांठ से अधिक मुआवजा हासिल करने का खेल रचा गया। पता लगा है कि दिसंबर 2023 में जमीन खरीदकर उस पर अस्थायी ढांचे खड़े कर दिए गए। मंडलायुक्त से इसकी शिकायत हुई तो जांच के लिए डीएम ने जनवरी 2024 में तीन सदस्यीय कमेटी गठित कर दी थी। आठ खरीदारों को नोटिस भी जारी हुए थे। इसी बीच डीएम का तबादला हो गया और मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। अब बरेली-सितारगंज हाईवे के लिए भूमि अधिग्रहण में घोटाला सामने आाने के बाद लेखपालों, लोक निर्माण विभाग और एनएचएआई के अधिकारियों-अभियंताओं में खलबली मची है।
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जांच टीम ने जिन आठ खरीदारों को नोटिस जारी किया था, उनमें से चार के नाम सामने आए हैं। इनमें लखनऊ की साधना सिंह, बरेली के रामेश्वर दयाल गंगवार, उत्तराखंड के रुद्रपुर के हिमांशु मित्तल और नवीन खेड़ा शामिल हैं। बरेली-सितारगंज हाईवे के लिए भूमि अधिग्रहण में हुए घोटाले की जांच में भी इनके नाम सामने आए हैं। हाईवे की मंजूरी मिलने की जानकारी मिलते ही यहां भी खरीदारों ने दलाल रमेश गुप्ता से ही संपर्क किया था। हालांकि, रमेश गुप्ता की अब मृत्यु हो चुकी है। किसानों के अनुसार अधिक मुआवजा निर्धारित करने के बदले लेखपालों, लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों, अभियंताओं और कर्मचारियों ने भी कमीशन तय किया था।
वर्जन
मामले की जानकारी ली जा रही है। सिटी मजिस्ट्रेट से फाइलें मांगी गईं हैं। आगे की कार्रवाई उसी के अनुसार होगी। - संजय कुमार सिंह, जिलाधिकारी

बरेली में अभिलेख छोड़कर पीलीभीत लौटे कर्मचारी

पीलीभीत। बरेली-सितारगंज के बीच प्रस्तावित हाईवे के भूमि अधिग्रहण मामले में घपलेबाजी की हकीकत परखने के लिए बरेली बुलाए गए एसएलएओ कार्यालय के स्टाफ को पीलीभीत लौटा दिया गया है। हालांकि, अभिलेख अभी बरेली में ही हैं। सिटी मजिस्ट्रेट विजय वर्धन तोमर ने बताया कि स्टाफ आ गया है। जल्द ही रिकॉर्ड भी मंगा लिया जाएगा। संवाद
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