पीलीभीत। बेटे का क्या कसूर है जो उसको प्रताड़ित किया जा रहा है। डेढ़ साल पहले छात्रा से बात किया करता था। उसके पिता ने शिकायत की, तो बेटे का स्कूल छुड़ाने के साथ ही पढ़ाई भी बंद करा दी। 13 नवंबर को छात्रा के पिता और भाई बेटे के बारे में पूछने आए, तो वह घर में ही था। पुलिस ने बुलाया, तो उसको लेकर थाने गए। कुछ देर बाद छोड़ दिया। इसके बाद रात दो बजे दो सिपाही बेटे को पकड़कर ले गए। एक-दो बार मिलवाया, मगर इसके बाद नहीं मिलने दिया।
आरोपी किशोर के पिता ने बताया कि डेढ़ साल पहले छात्रा और उनका बेटा एक ही स्कूल में पढ़ते थे। इसी दौरान दोनों की दोस्ती हो गई और बात किया करते है। इसी शिकायत छात्रा के पिता ने घर आकर की। इस पर बेटे की उसी दौरान स्कूल जाना बंद करवा दिया और पढ़ाई भी छुड़वा दी। बाद में देहरादून काम करने के लिए भेज दिया। चार माह बाद उसे घर बुला लिया और अपने साथ दुकान पर बैठाने लगे। छात्रा से उसकी बात भी नहीं होती थी। छात्रा के पिता ने भी कभी शिकायत नहीं की। इसी दौरान 13 नवंबर को रात आठ बजे छात्रा के पिता और भाई घर पर आए। उन्होंने बेटे के बार में पूछा और कहा पुलिस ने बुलाया है। इससे बेटे को लेकर थाने गए। पुलिस ने मेरे सामने ही करीब डेढ़ घंटे तक पूछताछ की और रजिस्टर पर हस्ताक्षर कराने और फिर बुलाने की बात कहकर वापस भेज दिया। इसके बाद रात दो बजे बाइक से दो सिपाही घर आए और बेटे को साथ लेकर थाने आ गए। इसके बाद अगले दिन 11 बजे कुछ देर के लिए मिलने दिया। पुलिस के अधिकारियों को बेटे के बेकसूर होने की बात कही। अधिकारियों ने भी आश्वासन दिया कि वह बेकसूर है। पूछताछ के बाद छोड़ दिया जाएगा। दो दिन पहले सादे वर्दी में पुलिस बेटे को लेकर घर आई कुछ देर उसका सामान में कुछ खोजते रहे। इसके बाद पुलिस फिर लेकर चली गई। घटना के दिन भी वह सुबह साढ़े आठ बजे घर से दुकान पर आ गया था। मेरा बेटा बेकसूर है।