मंडल स्तर पर एक लैब होने से भी होती है दिक्कत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भले ही किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड उपलब्ध कराने की घोषणा कर चुके हैं लेकिन जिले में मिट्टी में पाए जाने सभी तत्वों की जांच की सुविधा न होने के कारण किसानों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। सूक्ष्म तत्वों की जांच के लिए कृषि विभाग की बरेली में स्थित मंडल एक मात्र लैब पर आश्रित रहना पड़ता है।
मिट्टी की जांच कर किसानों को सही खाद उर्वरक के लिए प्रेरित करने एवं मृदा की उर्वरता बनाए रखने के लिए प्रधानमंत्री के निर्देश पर मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना प्रारंभ की गई है। इसके तहत कृषि विभाग के माध्यम से खेतों से मिट्टी के नमूने लेकर जांच की जाएगी और जांच रिपोर्ट के आधार पर किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड उपल्ब्ध कराया जाएगा। इस रिपोर्ट कार्ड में मिट्टी में उपलब्ध मुख्य तत्व नाइट्रोजन, फास्फोरस एवं पोटाश के अलावा छह सूक्ष्म तत्व सल्फर, जिंक, बोरॉन, ऑयरन, मैंगनीज, कॉपर की भी जांच की जानी है लेकिन जिले में सूक्ष्म तत्वों के जांच की सुविधा न होने से किसानों को समय से मृदा स्वास्थ्य कार्ड उपलब्ध होने की संभावनाएं नहीं हैं।
गत वर्ष जमा हुए थे 13 हजार नमूने
प्रधानमंत्री द्वारा मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना चलाने की घोषणा के समय से ही जिले में कृषि विभाग ने नमूने लेकर जांच शुरू करा दी थी। गत वर्ष जिले में लगभग 13 हजार नमने लिए गए थे जबकि इस वित्तीय वर्ष में अब तक करीब तीन हजार नमूने लिए जा सके हैं जिनमें से 11सौ किसानों को कार्ड भी उपलब्ध करा दिया गया है।
सूक्ष्म तत्वों की जांच मंडल स्तर पर बरेली में स्थित लेब से कराई जाती है। समय से जांच पूरी कराकर किसानों को कार्ड उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। जिले में भी सूक्ष्म तत्वों की जांच की व्यवस्था भी कराई जाएगी।
- एके सिंह, कृषि उपनिदेशक