पूरनपुर। बाघ को ट्रैंक्युलाइज (बेहोश) कर पकड़ने की समय सीमा बृहस्पतिवार शाम समाप्त हो गई। हजारा थाना क्षेत्र और लखीमपुर के संपूर्णानगर क्षेत्र में चहल-कदमी करने वाला बाघ हाथ नहीं लग सका। यहां तेंदुआ भी पकड़ने की अनुमति के बाद अब तक हाथ नहीं लगा। वहीं तेंदुए को पकड़ने की समय सीमा अभी शेष है।
हजारा थाना क्षेत्र के गांवों में तेंदुआ, हजारा और संपूर्णानगर क्षेत्र के गांव में बाघ पिछले कई दिनों से चहल-कदमी कर रहा है। बाघ को पकड़ने के लिए गांव कबीरगंज, भरतपुर, रामनगर के समीप पिंजरा लगाया गया, मगर बाघ पिंजरे के समीप तक नहीं आया। 23 मार्च को बाघ ने संपूर्णानगर क्षेत्र के गांव कृष्णा नगर में बछिया का शिकार किया था।
कृष्णानगर में बाघ की चहल-कदमी मिलने पर वहां भी पिंजरा लगाया गया। क्षेत्र में बाघ और तेंदुए की चहल-कदमी पर दोनों को पकड़ने की अनुमति ली गई। बाघ को ट्रैंक्युलाइज कर 11 मार्च से 26 मार्च तक पकड़ने की अनुमति मिली। वहीं, तेंदुआ को 19 मार्च से पखवाड़ा भर के अंदर पकड़ने की अनुमति मिली। बाघ और तेंदुआ को पकड़ने के लिए वन विभाग के अफसर जुटे रहे। इंतजार रहा कि बाघ और तेंदुआ एक ठिकाने पर रुकें तब उन्हें पकड़ने की कार्रवाई की जाए। बाघ के ट्रैंक्युलाइज कर पकड़ने की अनुमति बृहस्पतिवार शाम को समाप्त हो गई।
संपूर्णानगर के रेंजर ललित कुमार ने बताया कि बाघ और तेंदुआ की निगरानी लगातार टीमें करती रहीं। लगातार दोनों के ठिकाना बदलने पर नहीं पकड़ा जा सका। तेंदुआ को पकड़ने की समय सीमा अभी है। उसे समय सीमा के अंदर पकड़वाने की कोशिश की जा रही है। बाघ को पकड़वाने की अनुमति फिर से ली जाएगी। संवाद