पीलीभीत। बरेली-पीलीभीत-सितारगंज हाईवे के लिए भूमि अधिग्रहण में घपलेबाजी के मामले में कार्रवाई के बाद अब विवादित फाइलों का ग्रहण छंटने के आसार बन गए हैं। मुआवजे की प्रक्रिया रफ्तार पकड़ने की उम्मीद है। जिन किसानों से जमीन ली गई उनका करीब 55 करोड़ रुपये का भुगतान बाकी है। इसमें करीब 30 करोड़ रुपये की धनराशि विवादों की वजह से अटकी हुई है।
बरेली-सितारगंज हाईवे के निर्माण के लिए अगस्त 2024 में भूमि अधिग्रहण और परिसंपत्तियों के मुआवजे का मूल्यांकन कराया गया था। राजस्व कर्मियों और एनएच की टीम ने जांच कर रिपोर्ट दी। इसी दौरान एनएच के नवागत पीडी ने बरेली में कार्यभार संभाला। जांच की तो मुआवजे में परिसंपत्तियों के मूल्यांकन में गड़बड़ियों का पता चला। परत दर परत मामले खुलते चले गए।
मंडलायुक्त सौम्या अग्रवाल ने अपर आयुक्त प्रीति जायसवाल को जांच अधिकारी बनाया। जांच में अमरिया और सदर तहसील के राजस्व कर्मियों की लापरवाही तय हुई। रिपोर्ट आने पर जिला प्रशासन ने अमरिया तहसील के चार और सदर तहसील के एक लेखपाल को निलंबित कर दिया। एक राजस्व निरीक्षक को भी निलंबित किया गया।
परिसंपत्तियों के मूल्यांकन में लापरवाही और जांच ने मुआवजा वितरण पर भी असर डाला। कई विवादित मामले कोर्ट चले गए। कई अन्य ग्रामीणों का मुआवजा भी लटक गया। राजस्व कर्मियों पर कार्रवाई के बाद मुआवजे की प्रक्रिया के रफ्तार पकड़ने के आसार बने हैं। विवादित पत्रावलियां भी जल्द निपटाने के प्रयास होंगे।
गैर विवादित पत्रावलियों का वितरित हो रहा मुआवजा
हाईवे में जिले की अमरिया और सदर तहसील क्षेत्र के किसानों की जमीन अधिग्रहित की जा रही है। अधिग्रहण के लिए करीब 260 करोड़ रुपये का मुआवजा बांटना है। इसमें करीब 78 फीसद का भुगतान हो चुका है। सिटी मजिस्ट्रेट विजय वर्धन तोमर ने बताया कि करीब 55 करोड़ का मुआवजा बांटना शेष है। इसमें करीब 20 करोड़ डीएम और 10 करोड़ अलग अलग कोर्ट में विचाराधीन पत्रावलियों से संबंधित है। गैर विवादित पत्रावलियों के करीब 25 करोड़ रुपये के मुआवजा वितरण की प्रक्रिया चल रही है। नियमों में बदलाव के चलते अब मुआवजा भूमि राशि पोर्टल के जरिए वितरित किए जाने की वजह से थोड़ी देर हुई है।