सूखा प्रभावित जिलों में सरकार लोगों की सहूलियतें देने के लिए तमाम योजनाएं बनाकर अरबों रुपये पानी की तरह बहाती आ रही है, लेकिन इन योजनाओं का हश्र क्या होता है, इसकी तस्वीर जिले में देखी जा सकती है। शासन ने जनपद को सूखाग्रस्त की श्रेणी में रखते हुए ग्रीष्मावकाश में परिषदीय विद्यालयों में बच्चों को मिड डे मील देने के निर्देश थे, लेकिन यहां इस शासनादेश की शिक्षक ही धज्जियां उड़ा रहे हैं। अमर उजाला टीम ने मंगलवार को सुबह नौ से 11 बजे तक सरकारी स्कूलों का जायजा लिया तो तस्वीर कुछ यूं दिखी।
समय 10.00 बजे
प्राथमिक विद्यालय सुनगढ़ी
स्टेडियम रोड स्थित इस कैंप में प्राथमिक विद्यालय नंबर एक, दो समेत तीन विद्यालय संचालित हैं। मंगलवार को विद्यालय के मुख्य गेट पर ताले जड़े मिले। इंचार्ज प्रधानाध्यापिका से दूरभाष पर वार्ता करने का प्रयास किया, लेकिन संपर्क नहीं हो सका।
समय 10.30 बजे
परिषदीय आदर्श पूर्व माध्यमिक विद्यालय
नगर क्षेत्र के परिषदीय आदर्श प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालय तो खुले मिले, लेकिन यहां न तो एमडीएम था और न ही बच्चे। उच्च प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक प्यारेलाल ने बताया कि खाद्यान्न ही नहीं है तो एमडीएम कैसे बनवाएं।
समय 10. 20 बजे
प्राथमिक विद्यालय गिधौर
अमरिया ब्लाक क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय गिधौर के गेट पर ताले पड़े मिले। ग्रामीणों ने बताया कि जब से गर्मी की छुट्टियां पड़ी है, तबसे यहां कोई नहीं आया। प्रधानाध्यापिका से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका।
समय 10. 35 बजे
प्राथमिक विद्यालय नांद
प्राथमिक विद्यालय नांद भी बंद मिला। प्रधानाध्यापक महेश पाल ने दूरभाष पर बताया कि साढ़े दस बजे तक बच्चों का इंतजार किया गया, बच्चे न आने पर विद्यालय बंद कर दिया।
शुरू हुआ आंकड़ेबाजी का खेल
गर्मी की छुट्टियों में मिड डे मील बनवाने का शिक्षक जबरदस्त विरोध कर रहे हैं, लेकिन विभाग के आंकड़ों में एमडीएम वितरण शुरू हो गया। महकमे के आंकड़ों के मुताबिक 23 मई को 153 स्कूलों में एमडीएम बांटा गया।
शासन ने ग्रीष्मावकाश में बच्चों को एमडीएम देने के आदेश दिए हैं। जिन स्कूलों में एमडीएम वितरण नहीं होगा उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
- अंबरीष कुमार यादव, बीएसए