यूनाइटेड टीचर्स एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने ज्ञापन सौंपकर गर्मी की छुट्टियों के दौरान दिए जाने वाले मध्याह्न भोजन की व्यवस्था में परिवर्तन कराने की मांग की।
यूटा के जिला संयोजक फुरकान हाशमी के नेतृत्व में पदाधिकारियों ने बृहस्पतिवार को डीएम को संबोधित ज्ञापन उनके कार्यालय में सौंपा। सौंपे गए ज्ञापन में कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने शासन को मध्याह्न भोजन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए, लेकिन इस आदेश में शिक्षकों द्वारा भोजन बनवाना कहीं भी वर्णित नहीं है। शिक्षकों से शासनादेश की अनदेखी कर अतिरिक्त गैर शैक्षणिक कार्य लिए जाते हैं, लेकिन विद्यालयों के कार्यों में किसी का भी सहयोग प्राप्त नहीं होता है। कहा कि अधिकांश विद्यालयों में टीचिंग स्टाफ बाहर से आता है, जबकि आंगनबाड़ी वर्कर, सहायिका, प्रेरक, रोजगार सेवक, ग्राम प्रधान, कोटेदार स्थानीय होते हैं, ऐसे में मध्याह्न भोजन का कार्य इनसे ही लिया जाए। परिषदीय विद्यालयों में ग्रीष्मकालीन अवकाश दिया जाना सेवा शर्तों में शामिल है। जिस कारण शिक्षकों को अन्य सुविधाओं से वंचित रखा गया है। ऐसे में ग्रीष्मकालीन अवकाश में शिक्षकों से कार्य लिया जाना उनके संवैधानिक अधिकारों का हनन भी है। ज्ञापन में गर्मी की छुट्टियों के दौरान मध्याह्न भोजन के संचालन में शिक्षकों के अतिरिक्त उपरोक्त अन्य कर्मचारियों को उत्तरदायित्व सौंपा जाना न्यायसंगत होगा।