टाइगर रिजर्व के डीएफओ ने शारदा पार गुन्हान क्षेत्र में वन सीमा से सटे इलाके में सीमांकन होने से पूर्व पट्टा आवंटन की शुरू की गई प्रक्रिया पर रोक लगाने का एसडीएम से आग्रह किया है। वहीं ग्रामीणों का आरोप है कि वन विभाग की सैकड़ों एकड़ भूमि पर अवैध कब्जों के चलते वन विभाग वर्षों से सीमांकन नहीं करा पा रहा है। जिसके चलते भूमिहीन बाढ़ पीड़ित परिवारों को ग्राम समाज की भूमि पर पट्टा नहीं मिल पा रहा है।
शारदा नदी के पार रमनगरा, गुन्हान एवं ढकिया ताल्लुके महाराजपुर, भूड़ा गोरख डिब्बी क्षेत्र में बड़े पैमाने पर टाइगर रिजर्व की भूमि पर अवैध कब्जेदार वनकर्मियों से सांठगांठ कर सैकड़ों एकड़ भूमि पर कृषि फसलें पैदा रहे हैं। जिसमें लग्गा भग्गा की भूमि भी शामिल है। वन विभाग कृषि फसलें पकने पर सीमांकन की आवाज उठाता है, लेकिन फसलें कटते कटते सीमांकन तो होता नहीं, बल्कि सीमांकन करने की बात भी भुला दी जाती है। राजस्व विभाग के कर्मचारी हमेशा यह कहते रहे कि जहां वन विभाग की भूमि हो, वन विभाग अपना सीमांकन कर लेे, शेष ग्राम समाज की भूमि पर भूमिहीनों के पट्टे कराए जा सके। उधर वन विभाग ने जब सीमांकन नहीं किया तो लंबे इंतजार के बाद राजस्व विभाग ने भूमिहीन बाढ़ पीड़ितों को कृषि भूमि का पट्टा आवंटन करने की प्रक्रिया शुरू कर दी। यह मामला जब अमर उजाला ने प्रमुखता से उठाया तो टाइगर रिजर्व के डीएफओ कैलाश प्रकाश ने इसको संज्ञान में लेते हुए एसडीएम को पत्र भेजकर वन सीमा से सटे इलाके में सीमांकन से पूर्व पट्टा आवंटन प्रक्रिया पर रोक लगाने का आग्रह किया। इसकी जानकारी राजस्व कर्मियों के माध्यम से ग्रामीणों व प्रधानों को हुई। जिस पर प्रधान प्रशांत साना सहित बाढ़ पीड़ितों ने डीएम व एसडीएम को पत्र भेजकर वन विभाग की जमीन का सीमांकन कराने और ग्राम समाज की भूमि पर पट्टा आवंटन प्रक्रिया शुरू कराने की मांग की है। प्रधान का कहना था कि वह अपनी ग्राम पंचायत की जमीन में बाढ़ पीड़ितों व भूमिहीनों बसाना चाहते हैं, जो लंबे अरसे से डैम में वर्जित क्षेत्र में रह रहे हैं। इधर वन विभाग संयुक्त सीमांकन तो नहीं कर रहा, लेकिन मामले को लंबे समय से सीमांकन की बात कहकर लटकए हुए है।
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