बिलसंडा (पीलीभीत)। कर्ज से परेशान बुजुर्ग बिलसंडा क्षेत्र के गांव ताजपुर ढकिया जलालपुर निवासी 65 वर्षीय कुंदन राजपूत ने फंदा लगाकर जान दे दी। उसका शव बुधवार सुबह छह बजे मकान से आधा किलोमीटर दूर सिरसा के पेड़ पर प्लास्टिक की रस्सी के फंदे से लटका मिला। परिवार वालों से सूचना मिलने पर पहुंची पुलिस ने मौका मुआयना कर जानकारी जुटाई। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
मृतक के बेटे अमरपाल ने बताया कि उसके पिता कुंदन राजपूत मजदूरी करते थे। उनका मनरेगा में भी जॉब कार्ड बना था। कर्ज अधिक होने की वजह से पिता परेशान चल रहे थे। बुधवार सुबह करीब साढ़े पांच बजे जागने के बाद बिना बताए घर से निकल गए। आधा घंटे बाद पिता का शव मकान से 500 मीटर दूर बमरौली-भदेनकंजा मार्ग पर सिरसा के पेड़ पर फंदे से लटका मिला। खेतों पर काम करने जा रहे ग्रामीणों ने शव लटका देखा तो पूरे गांव में शोर मच गया। कुछ ही देर में भीड़ जमा हो गई। परिवार के सदस्य भी मौके पर पहुुंच गए। घटना की सूचना पुलिस को दी गई। बिलसंडा इंस्पेक्टर रविंद्र कुमार फील्ड यूनिट टीम के साथ मौके पर पहुंचे। शव को फंदे से उतारकर कब्जे में लिया। परिजन ने कर्ज से परेशान होकर खुदकुशी करने की बात कही। हालांकि किसी पर प्रताड़ित करने का आरोप नहीं लगाया, न ही कोई तहरीर दी।
बेटे और बेटी की शादी को लिए कर्ज के चुकता न होने से थे परेशान
फंदा लगाकर जान देने वाले मजदूर कुंदन राजपूत की माली हालत लगातार बिगड़ती जा रही थी। उनके पास सिर्फ तीन बीघा जमीन थी। उसी पर खेती करने के अलावा मजदूरी किया करते थे। बेटा-बेटी की शादी के लिए लिया कर्ज अभी चुकता नहीं हो सका था।
मृतक के दो बेटे बनवारी, अमरपाल, जबकि चार बेटी उर्मिला, मनोजवती, गीता देवी और तारावती हैं। इसमें तारावती को छोड़ सभी पांच बच्चों की शादी हो चुकी है। परिवार वालों के अनुसार सालों से लगातार कर्ज बढ़ता जा रहा था। करीब नौ साल पहले बेटे अमरपाल की शादी के वक्त भूमि विकास बैंक से 90 हजार रुपये का कर्ज लिया था, जोकि अभी तक चुकता नहीं हो सका था। फिर पिछले महीने 14 मई को बेटी गीता देवी की शादी की थी। उसके लिए भी दो सराफा व्यापारियों से पहले ब्याज पर 1.20 लाख रुपये लिए थे। बाद में जरूरत पड़ने पर पुत्रवधु के जेवर गिरवी रख दिए थे और 70 हजार रुपये का कर्ज लिया था। इसके बाद भी परिवार के भरण पोषण को कर्ज लिया था। गांव के कुछ लोगों ने मदद करते हुए बिना ब्याज ही रुपये उधार दे दिए थे। छोटी अविवाहित बेटी तारावती के गाल पर फोड़ा निकल आया था। उसका लंबे समय से इलाज चल रहा था। अब उसका ऑपरेशन बताया गया था। इसकी भी चिंता उन्हें सता रही थी। कोरोना कर्फ्यू के दौरान बैंक के कर्ज को लेकर कुछ कर्मचारी भी तकाजा करने आए थे। परिवार का कहना है कि मगर कोई अभद्रता या दबाव नहीं बनाया था। कर्ज बढ़ रहा था और वापस करने की चिंता में पिता परेशान हो गए थे। एक सप्ताह से सही से खाना नहीं खा रहे थे, कम ही बोल रहे थे। उन्होंने कर्ज के बोझ को ही खुदकुशी के पीछे वजह मुख्य वजह बताया है।
मनरेगा में भी नहीं मिल सका था काम
मृतक के परिवार वालों ने बताया कि वैसे तो कुंदन राजपूत का मनरेगा में भी जॉब कार्ड बना हुआ था। मगर काम नहीं मिल सका था। कहा कि कुछ दिन पहले गांव में तालाब की खुदाई का काम मनरेगा के तहत कराया गया था। मगर उसमें मजदूरी नहीं मिल सकी थी। हालांकि ये काम कुछ दिन ही चला था।
बुजुर्ग का शव फंदे पर लटका मिलने की सूचना आई थी। इस पर बिलसंडा पुलिस को मौके पर भेजा गया था। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। अगर कोई तहरीर परिवार देता है तो जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी। - किरीट कुमार, एसपी