पीलीभीत के स्टेडियम मार्ग पर घूमते छुटृा पशु।संवाद
पीलीभीत। छुट्टा पशु किसानों की फसलों को नुकसान तो पहुंचा ही रहे, हादसे का कारण भी बन रहे हैं। सड़कों पर डेरा जमाए पशुओं से टकराकर और इनके हमले में कई लोगों की जान चुकी है। पशुओं को गो-आश्रय स्थलों पर संरक्षित करने का दावा करने वाले अफसर शहर और कस्बों की सड़कों पर घूमते छुट्टा पशुओं से बेखबर हैं।
शनिवार की शाम सांड़ के हमले में जमीन पर गिरे पूरनपुर कोतवाली क्षेत्र के गांव महादिया निवासी किसान के ऊपर से पशुओं का झुंड रौंदते हुए निकल गया था। इससे किसान की मौत हो गई। इसी तरह कई अन्य घटनाएं हो चुकी हैं।
सांड़ के हमले और सड़क पर पशुओं से टकराकर कई घरों का चिराग बुझ चुका है। कई लोग चोटिल होकर इलाज करा रहे हैं। मगर जिम्मेदार इन पशुओं को गो-आश्रय स्थल पर संरक्षित करने से बेपरवाह हैं। जिला मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. अरविंद ने बताया कि जिले में संचालित 61 गो-आश्रय स्थलों में 6400 पशु संरक्षित किए गए हैं।
सड़कों पर खेतों में घूम रहे पशुओं को पकड़वाकर गो-आश्रय स्थल में संरक्षित कराने के लिए ब्लॉकों के बीडीओ और ईओ को लगातार कहा जा रहा है।
कई मार्गों पर दिखते हैं छुट्टा पशु
शहर की सभी प्रमुख सड़कों और गलियों में छुट्टा पशु विचरण करते दिखते हैं। गौहनिया चौराहे से स्टेडियम मार्ग के कूड़ा डलावघर के पास पूरे दिन पशु सड़क पर खड़े रहते हैं। सुनगढ़ी थाने से स्टेशन मार्ग पर भी छुट्टा पशुओं की चहलकदमी दिखती है। इसी तरह से अन्य मार्गों पर भी छुट्टा पशु डेरा जमाए दिखते हैं।
केस- एक : नवंबर के पहले सप्ताह में घुंघचाई थाना क्षेत्र के गुलड़िया भूपसिंह निवासी तौलेराम पर मंदिर के पास छुट्टा पशुओं के झुंड ने हमला कर दिया था। इसमें तौलेराम की मौत हो गई थी। गांव कसगंजा निवासी युवक की छुट्टा पशु से टकराकर मौत हो गई थी।
केस- दो: घुंघचाई थाना क्षेत्र के गांव कसगंजा की स्थानीय बाजार में दिसंबर में सांड ने हमला कर करीब 10 दुकानदारों और खरीदारों को घायल कर दिया था। कई लोगों ने अस्पताल पहुंचकर इलाज कराया था।