पूरनपुर। अफसरों की अनदेखी से राहुलनगर के समीप हो रहा बाढ़ बचाव कार्य अब तक पूरा नहीं हो सका है। शारदा नदी की लहरें ग्रामीणों को डरा रहीं हैं। नदी का जलस्तर बढ़ने से सप्ताहभर पहले से काम बंद भी है। धनाराघाट के पास जियो बैग लगाने का काम भी अधूरा है। नदी कब उफना जाए और क्षेत्र में तबाही मचा दे, यह सोचकर राहुलनगर की पांच हजार की आबादी की नींद उड़ी हुई है।
शारदा नदी हर साल क्षेत्र में तबाही मचाती है। बाढ़ और कटान से बचाव के लिए पिछले साल नौ करोड़ रुपये की लागत से नदी का चैनेलाइजेशन कराया गया। इतनी ही लागत से गांव चंदिया हजारा के समीप डौला (तटबंध का रूप) बनाया गया। मगर पहली बाढ़ में ही डौला कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त हो गया। नदी का चैनेलाइजेशन भी बाढ़ को नहीं रोक सका।
बाढ़ की तबाही रोकने के लिए इस बार चंदिया हजारा और राहुलनगर के समीप तीन करोड़ से अधिक धनराशि से बचाव कार्य शुरू कराए गए हैं। चंदिया हजारा के समीप तो काम पूरा हो गया है। राहुलनगर के समीप काम अब तक अधूरा है। सप्ताहभर पहले नदी के उफनाने से काम रुका है। यहां के बचाव कार्य में शुरुआत से ही हीलाहवाली रही। शुभारंभ के एक माह बाद तक काम शुरू नहीं कराया जा सका था। बीच में भी एक सप्ताह तक काम बंद रहा था।
इसके अलावा चैनेलाइजेशन से बची धनराशि से नदी के धनाराघाट के समीप 10 जियो ट्यूब लगाना शुरू किए गए। तीन जियो ट्यूब ही लग पाए थे कि नदी का जलस्तर बढ़ गया। जियो ट्यूब लगाने का काम बंद हो गया था। बुधवार दोपहर को नदी का जलस्तर कुछ कम होने पर जियो ट्यूब लगाना शुरू किया गया। इसके लिए प्रधान के कहने पर गांव के कई लोग मदद करने भी पहुंचे थे। इस दौरान नदी का जलस्तर अचानक बढ़ने से काम फिर रोकना पड़ा। चंदिया हजारा के प्रधान बासुदेव कुुंडू ने बताया कि राहुलनगर के समीप काम पूरा नहीं हो सका है। धनाराघाट के समीप अभी तीन जियो ट्यूब ही लग सके हैं।
बाढ़ से गांव को बचाने के लिए धरना-प्रदर्शन किया। इसके बाद बचाव कार्य शुरू तो हुआ, लेकिन काफी देर से। मानसून आ चुका है। नदी का जलस्तर बढ़ना शुरू हो गया है। नदी कब तबाही मचा दे, इसका भय बना है। अगर काम पूरा होने से पहले बाढ़ आई तो गांव काे बचाना मुश्किल होगा।- किरन, राहुलनगर।
नदी हर साल तबाही मचाती है। हर साल बचाव कार्य के नाम पर करोड़ों रुपये ठिकाने लगाए जाते हैं। नदी किनारे विशाल बांध बने। ताकि हर बार की समस्या से निजात मिले। जो बचाव कार्य हो रहा है। इससे बाढ़ के रुकने की संभावना कम है।- शिखा, राहुलनगर।
बारिश से पहले ही बाढ़ से निपटने की तैयारियां शुरू हो जाती हैं। घरों का सामान ऊंचे स्थानों पर रखना शुरू किया जाता है। हर साल नदी तबाही मचाती है। अगर बाढ़ से बचाव कार्य कराना ही था तो समय से शुरू होता। बचाव कार्य पूरा होने को लेकर असमंजस की स्थिति है।- चंदना, राहुलनगर।
बाढ़ से बचाने के लिए नदी किनारे कराए जा रहे बचाव कार्य की गति काफी धीमी है। समय से पूरा होने की उम्मीद नहीं है। बाढ़ आने पर काम को पूरा दिखाकर धनराशि का बंदरबांट कर लिया जाएगा।-प्रेमानंद, बीडीसी राहुलनगर।
पूरनपुर क्षेत्र के गांव राहुलनगर के पास चल रहा बाढ़ बचाव कार्य स्रोत : ग्रामीण
पूरनपुर क्षेत्र के गांव राहुलनगर के पास चल रहा बाढ़ बचाव कार्य स्रोत : ग्रामीण
पूरनपुर क्षेत्र के गांव राहुलनगर के पास चल रहा बाढ़ बचाव कार्य स्रोत : ग्रामीण
पूरनपुर क्षेत्र के गांव राहुलनगर के पास चल रहा बाढ़ बचाव कार्य स्रोत : ग्रामीण