जिले का वन महकमा प्रदेश शासन के एक आदेश का 19 साल बीतने के बाद भी पालन नहीं कर सका है। इसके चलते न केवल वन विभाग की जमीन खुर्द-बुर्द हो रही है बल्कि वन क्षेत्रों में अवैध कटान का सिलसिला भी जारी है। बैल्हा वन क्षेत्र में छह दिन पूर्व वन भूमि पर अवैध कब्जे के प्रयास को इसी लापरवाही का नतीजा माना जा रहा है। मामले में बैल्हा के ग्राम प्रधान सहित 300 लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी।
प्रदेश शासन ने वर्ष 1995 में प्रदेश भर के सभी जनपदों के वन क्षेत्रों को उन्हीं जनपदों की वन रेंजों में समायोजित करने का आदेश दिया था। इसके बाद पीलीभीत वन प्रभाग में पड़ने वाली सुरई रेंज व खटीमा रेंज को उधम सिंह नगर में ट्रांसफर कर दिया था। इस बीच लखीमपुर खीरी वन प्रभाग के संपूर्णानगर रेंज में पड़ने वाले वन क्षेत्र को जब हस्तांतरित करने कीकार्रवाई शुरू हुई तो तत्कालीन अफसरों ने शारदा नदी के इस पार का इलाका अपने कब्जे में ले लिया लेकिन शारदा नदी के दूसरे पार का इलाका का भौतिक सत्यापन न होने की बात कहते हुए लेने से इंकार कर दिया था। शासन स्तर से दबाव पड़ने पर 1883 हेक्टेयर बैल्हा वन क्षेत्र को हस्तांतरित करवा लिया गया लेकिन जनपद की सीमा में पड़ने वाले संपूर्णानगर रेंज का इलाका छोड़ दिया गया।
यही नहीं, संपूर्णानगर रेंज का इलाका छोड़ देने के कारण शारदा पार कोई वन चौकी नहीं खोली जा सकी। बैल्हा वन क्षेत्र की राजपुर सिमरा स्थित वन चौकी से ही देखरेख की जा रही है। इस कारण कई बार अतिक्रमणकारी वन भूमि पर कब्जे के प्रयास भी कर चुके हैं।
बराही रेंज का बैल्हा वन क्षेत्र शारदा नदी की बदलती धारा के चलते पूर्व के अफसरों ने संपूर्णानगर वन रेंज की देखरेख में छोड़ दिया था। टाइगर रिजर्व का दायरा बढ़ाने के लिए उसको हस्तांतरित कराकर अब अपने कब्जे में लेने के साथ वहां वन कर्मियों की तैनाती की जाएगी।
- मोहम्मद शहनियाज, वन क्षेत्राधिकारी, बराही