नलडेंगा में शारदा सागर खंड द्वारा कराए गए कार्यों का हाल
शारदा सागर खंड द्वारा नलडेंगा में सनेड़ी तटबंध पर बने स्परों को बचाने के लिए कराया गया कार्य कटान के चलते नदी की भेंट चढ़ गया। अब स्परों के शेष बचे भाग के कटान का खतरा पैदा हो गया है। वहीं शारदा नदी सनेड़ी तटबंध के करीब पहुंचने का प्रयास कर रही है। इसके पीछे शारदा सागर के अभियंताओं की लापरवाही है जिन्होंने बरसात से पहले यहां एक भी कार्य नहीं कराया।
प्रदेश सरकार ने शारदा डैम को शारदा नदी से सुरक्षित रखने को सनेड़ी तटबंध बनाने के साथ बांध के किनारे पत्थर की बड़ी ठोकरें बनाई थीं। इसकी देखभाल की जिम्मेदारी शारदा सागर खंड के पास थी, लेकिन अभियंताओं के कोई ध्यान न देने के कारण ठेकेदारों ने मनमानी करते हुए मनमाफिक कार्य कराया। यहां लगे तार के जाल सड़ने लगे और गत वर्ष स्पर संख्या 18 व 19 का काफी हिस्सा नदी की भेंट चढ़ गया था। इसके बाद जब मामला अखबारों की सुर्खियां बना, तब शारदा सागर के अभियंताओं को बचाव कार्य की याद आई। अभियंताओं ने स्परों की नोज (अगले भाग) पर बचाव कार्य कराए। कहा गया कि बरसात के बाद कार्य होगा, लेकिन पूरा वर्ष बीत गया लेकिन धेले भर का कार्य नहीं कराया गया। अब पुन: बरसात ने दस्तक दी तो फिर स्परों के नोज पर कार्य के नाम पर खानापूरी शुरू कर दी गई।
दो दिन पहले जब शारदा नदी ने सनेड़ी तटबंध की ओर कटान शुरू किया तो स्पीर संख्या 19 पर कराया गया कार्य शारदा में समा गया। इससे पड़ोस के ग्रामीणों में हड़कंप मच गया। बताते चलें कि सनेड़ी तटबंध के बने बांध से नदी मात्र दस मीटर की दूरी पर है। बांध के अपस्ट्रीम के बाहरी हिस्से में नौतेला झील पड़ती है। उसके बाद महत्वपूर्ण शारदा डैम है। ऐसे में बचाव कार्य इसी दस मीटर के दायरे में होते तो आज स्थिति बदतर नहीं होती। यदि इसी तरह से लापरवाही रही और स्पर बहते रहे तो स्थिति और भी बिगड़ सकती है। मालूम हो कि शारदा नदी बाढ़ खंड के अधीन है, लेकिन सनेड़ी तट बंध का भाग शारदा सागर की देखरेख में चला आ रहा है। उसे बाढ़ खंड को स्थानांतरित नहीं किया गया। जिसके चलते यहां स्थिति और भी बिगड़ सकती है।
रमनगरा बुझिया में नवनिर्मित कटर भी नदी में समाए
रमनगरा बुझिया में बाढ़ खंड के द्वारा बनवाए जा रहे कटर एक-एक कर नदी में समाते जा रहे हैं। यहां बाढ़ खंड के अभियंताओं ने टेंडर होने के डेढ़ माह बाद बचाव कार्य शुरू कराए हैं। यहां लगभग 34 कटर बनाए जाने हैं। हालांकि यहां बरसात पूर्व कार्य कराया जा सकता था, लेकिन खाऊ कमाऊ नीति के चलते यहां बरसात शुरू होने पर बचाव कार्य शुरू किए गए। बाढ़ खंड के अभियंता बताते हैं कि नदी ने यहां पर गोलाई में कटान शुरू किया था। अब पानी बढ़ा है तो नीचे से रेत को काट रहा है। ऐसे में लगाए गए बोरे पानी में समा रहे हैं। उन्हें रोकने का प्रयास किया जा रहा है।