राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस की मार्गदर्शक कार्यशाला में डीआईओएस ने माध्यमिक स्कूलों के शिक्षकों से विज्ञान प्रदर्शनी में शत-प्रतिशत प्रोजेक्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। कार्यशाला में करीब सौ शिक्षकों को प्रशिक्षित किया गया।
सनातन धर्म बांके बिहारी राम इंटर कॉलेज के महादेवी सभागार में सोमवार को हुई कार्यशाला का शुभारंभ मां सरस्वती के पूजन से किया गया। इस दौरान डीआईओएस जेके वर्मा ने कहा कि राष्ट्रीय बाल विज्ञान विश्व की सबसे बड़ी गतिविधि है तो अंतर्राष्ट्रीय स्तर तक संचालित होती है। उन्होंने बाल विज्ञान कांग्रेस में विद्यालयों की सहभागिता पर खेद व्यक्त करते हुए कहा कि माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों को जिस प्रकार इसमें रूचि लेना चाहिए, उस तरह नहीं ली जा रही है। कार्यशाला का यह पहला स्तर है। आगे से नोडल स्तर पर शत प्रतिशत विद्यालय अपने अपने विद्यालयों से प्रोजेक्ट प्रस्तुत करें। कहा कि कस्तूरबा विद्यालय व उच्च प्राथमिक विद्यालयों के शिक्षकों ने भी इसमें प्रतिभाग किया है। अब यह गतिविधि इन विद्यालयों में भी संपन्न होगी। इससे पूर्व रामलुभाई साहनी महिला महाविद्यालय के प्रवक्ता डॉ. दिनेश चंद्रा व डॉ. बृजेश राठन ने बताया कि मानव का पूरा जीवन ही मौसम व जलवायु से प्रभावित होता है। स्थान-स्थान पर खानपान, रहन सहन, स्वभाव व प्रवृत्तियां जलवायु से ही प्रेरित होती है। कार्यशाला में जिला विज्ञान क्लब समन्वयक लक्ष्मीकांत शर्मा व जिला समन्वयक प्रभात कुमार गुप्ता द्वारा प्रोजेक्ट बनवाने की पूरी प्रक्रिया की जानकारी दी गई। समन्वयक ने बताया कि कार्यशाला में भाग लेने वाले शिक्षक अब अन्य शिक्षकों को जानकारी देकर विद्यालय स्तर पर सितंबर माह में प्रोजेक्ट बनवाएंगे और फिर उन्हें अक्टूबर में नोडल व जिला स्तरीय आयोजन में प्रस्तुत करेंगे। नोडल समन्वयक स्वाति सिंह, संजय दुबे, ममता गंगवार, रचना सिंह, चंद्रपाल गंगवार, संजय कुमार पांडेय, महेंद्रपाल सिंह, उमाशंकर शर्मा आदि ने प्रोजेक्ट तैयार करने की बारीकियों को समझाया।