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अफसरों ने फाइलों में उगा दी उड़द की फसल, खेतों में नामोनिशान नहीं

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बीसलपुर। सरकार दलहन उत्पादन के लिए पांच एकड़ जोत वाले किसानों को उड़द के बीज पर शत प्रतिशत सब्सिडी देती है। उड़द का बीज 90 रुपये प्रति किलो मिलता है। किसानों को पूरा पैसा राजकीय कृषि बीज भंडार गृहों पर बीज लेते समय तुरंत चुकाना पड़ता है। मगर, बाद में आधी सब्सिडी उनके खातों में पहुंच जाती है। इस बार कृषि विभाग ने 50 प्रगतिशील किसानों को उड़द का बीज आधी सब्सिडी पर देना दर्शाया। मगर, जिन किसानों को उड़द का बीज दिया गया, वहां उड़द की फसल गायब है। किसानों की खेतों में दूसरी फसलें खड़ी हैं। इतना ही नहीं, कुछ किसान तो उड़द के बीज की दाल बनाकर खा गए।
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जनपद में सात राजकीय कृषि बीज भंडार हैं। कृषि विभाग के अभिलेखों के अनुसार, लगभग एक माह पूर्व राजकीय कृषि बीज भंडार गृहों में कृषि विभाग के अधिकारियों की ओर से इलाके के विभिन्न गांवों में 50 चयनित प्रगतिशील किसानों को उड़द की खेती करने के लिए प्रति किसान 15 किलो बीज 100 फीसदी अनुदान पर दिया गया। किसानों ने यह बीज गोदामों से नगद रुपये देकर खरीदा। बाद में सब्सिडी की राशि किसानों के बैंक खातों में भेज दी गई। इन किसानों से कहा गया कि वह उड़द की खेती अत्याधुनिक तरीके से करें, ताकि उसकी अच्छी उपज देखकर गांव के अन्य किसान भी प्रेरित होकर उड़द की खेती करने लगें। मगर, कृषि विभाग ने कागजों में जिन 50 प्रगतिशील किसानों को उड़द का बीज देना दर्शाया, उन्होंने उसे खेतों में नहीं बोया। न ही वह उड़द की खेती कर रहे हैं। जो किसान राजकीय बीज भंडार से उड़द का बीज ले गए, उनमें से अधिकांश ने सब्सिडी तो खाते में ले ली, मगर, खेती कहीं नहीं की। जिन किसानों को अनुदान पर बीज दिया गया, उनके खेतों में उड़द की जगह दूसरी फसलें खड़ी हैं। कृषि विभाग ने भी उड़द की खेती का झूठा आंकड़ा पेश कर सरकार और उच्चाधिकारियों को गुमराह किया और सब्सिडी की रकम ठिकाने लगा दी। इससे शासन की उड़द की खेती को बढ़ावा देने की मंशा पर पानी फिर गया।
इन गांवों के किसानों को मिला उड़द का बीज
जसोली, दिवाली, भड़रिया, भैनपुरा, चौसर हरदोपटटी, मंडरा सुमन, जल्लापुर, उगनपुर मरौरी, मोहम्मदपुर भजा, चौखंडी, परसिया, खानपुर वीरमपुर, साबेपुर, कनगवां, रुरिया, और बरसिया आदि गांवों के 50 प्रगतिशील किसानों को उड़द का बीज अनुदान पर दिया गया।
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किसी किसान ने नहीं बोया उड़द
कृषि विभाग ने जिन गांवों में उड़द की आधुनिक तकनीक से खेती होना अपने कागजों में दर्शाया है, हकीकत में उन गांवों में उड़द की खेती नहीं हो रही। किसी भी किसान के खेत में उड़द की फसल नहीं खड़ी है। यह सब कुछ सब्सिडी की रकम ठिकाने लगाने के लिए किया गया। - रुपलाल राठौर, प्रधान, गांव जसोली दिवाली
केवल कागजों में बांटा बीज
कृषि विभाग ने मेरे गांव के एक प्रगतिशील किसान को भी 15 किलो उड़द का बीज देना दिखाया है। मगर, उसके खेत में उड़द की खेती नहीं हो रही। कृषि विभाग ने किसानों के नाम पर उड़द का बीज देना दिखाकर झूठी वाहवाही लूटी। सब्सिडी की रकम ठिकाने लगाई। - मिथलेश कुमारी गंगवार, प्रधान साबेपुर।
बीज की दाल बनाकर खा गए
कृषि विभाग ने मेरी ग्राम पंचायत बरसिया और चौखंड़ी के दो किसानों को उड़द की खेती के लिए बीज दिया था। दोनों किसान उड़द की बीज की दाल बनाकर खा गए। अभिलखों में फर्जी ढंग से उड़द की खेती होना दर्शा दिया गया। कहीं खेत में उड़द नहीं खड़ी है। - बुधपाल सिंह, प्रधान बरसिया
अभिलेखों में हो रही उड़द की खेती
कृषि विभाग ने गांव के एक किसान को प्रगतिशील बताकर उसे उड़द का अनुदान पर बीज उपलब्ध कराया। कृषि विभाग के अभिलेखों के अनुसार उस किसान के खेत में उड़द की खेती हो रही है, लेकिन हकीकत इससे अलग है। उसने अपने खेत में कहीं उड़द नहीं बोई। - अजंता कुमारी, ग्राम प्रधान जल्लापुर
बीज वितरण में पूरी पारदर्शिता बरती
ब्लॉक क्षेत्र के विभिन्न गांवों के 50 प्रगतिशील किसान बीज भंडार से अनुदान पर बीज ले गए। उनका रिकॉर्ड बीज भंडार में जमा है। रजिस्टर पर बीज की रिसीविंग है। उनके मोबाइल नंबर भी दर्ज हैं। उड़द के बीज वितरण में पूरी पारदर्शिता बरती गई है। - संजीव मौर्य, प्रभारी राजकीय बीज भंडार, बीसलपुर।
शिकायत मिलने पर होगी जांच
मौके पर भले ही उड़द की खेती न हो रही हो, हमारे अभिलेखों में ब्लॉक क्षेत्र के विभिन्न गांवों के 50 किसान उड़द का बीज ले गए और वह उड़द की खेती भी कर रहे हैं। इस संबंध में हमें लिखित शिकायत मिलेगी तो जांच करवाई जाएगी। - चेतराम सहायक विकास अधिकारी (कृषि), बीसलपुर।
उड़द की खेती के बीज वितरण का मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। न ही इस तरह की कोई योजना मेरे विभाग के स्तर पर चल रही है। हम इसकी जानकारी करेंगे। - विनोद कुमार, जिला कृषि अधिकारी
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