अमर उजाला फाउंडेशन व जिला विज्ञान क्लब के संयुक्त तत्वावधान में सुरक्षित होली शुभ होली को ध्यान में रखते हुए जागरूकता गोष्ठी हुई। जिसमें होली पर्व को सुरक्षित तरीके से मनाने व इसके प्रति दूसरों को जागरूक करने का आहवान किया गया। वहीं होली से जुड़े पहलू भी किशोरपीढ़ी के सामने रखे गए।
शहर के रानी अवंतीबाई जूनियर हाईस्कूल में हुई गोष्ठी में ममता वर्मा ने कहा कि होलिका दहन बुराई पर अच्छाई की विजय का स्मरण है। शिक्षक सुरेश चंद्र ने कहा कि होली ऋतु परिवर्तन का समय है। जाड़ों मे त्वचा शुष्क रहती है। पूर्व में गुलहड़, सेमल, पलाश, हरसिंगार, अमलतास व हल्दी रंगों का चलन था। इन फूलों के प्राकृतिक रंग एंटीफंगल व एंटीबायोटिक होने के कारण त्वचा को कोई नुकसान नहीं होता है। ऋतु परिवर्तन के पर्व में होली खेलने की परपंरा का यही वैज्ञानिक आधार है। गोष्ठी में छात्रा छाया ने गुब्बारों का प्रयोग न करने की अपील की। इस दौरान छात्रा नैना व रोशनी गीत प्रस्तुत किए। गोष्ठी में दोनों छात्राओं के साथ अन्य छात्राओं को भी पुरस्कृत किया गया। गोष्ठी में कई शिक्षक शिक्षिकाओं समेत विद्याथर्यिं ने अपने विचार रखे।
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सावधानी क्यों जरुरी?
गोष्ठी में होली पर्व के दौरान सावधानी को लेकर चर्चा हुई। जिला विज्ञान क्लब के समन्वयक लक्ष्मीकांत शर्मा ने कहा कि प्रकृति से मानवीय छेड़छाड़ के चलते प्राकृतिक रंगों का स्थान सिंथेटिक रगों ने लिया। गाढ़ा रंग, गुब्बारों में रंग भरकर फेंकना का चलन तेजी से है। इससे एलर्जी के साथ दमा रोगियों को असुविधा होने के मामले बहुतायत में प्रकाश आने लगे हैं। चलती ट्रेन पर कीचड़ फेंकना, होली के बहाने छेड़छाड़ की घटनाएं भी सामने आने लगी है। इस दौरान विभिन्न सावधानियां बरतने की ताकीद की गई।
- पानी के रंगों के साथ होली खेलने में रुचि न लें।
- गुलाल के साथ ही होली खेलें।
- पर्यावरण मित्र व त्वचा मित्र रगों का प्रयोग करें।
- रंग खेलने के दौरान दूसरों की भावनाओं का खासा ध्यान रखें।
- खांसी जुकाम से पीड़ित व दमा रोगियों पर रंग न डालें।
- सिंथेटिक या केमिकलयुक्त रंगों के प्रयोग से परहेज करें।
- खानपान संयमित रखें।
- रंगों को मुंह के भीतर न जाने दें।
- जानवरों पर रंग न डालें। चमकीले गुलाल का प्रयोग न करें।
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सर्दी जुकाम से पीड़ितों पर न डाले रंग
गोष्ठी में काय चिकित्सक डॉ. हरीशंकर मिश्रा ने कहा कि दमा रोगियों व सर्दी जुकाम से पीड़ितों पर रंग न डाले। गुलाल आदि के प्रयोग से इन सभी को खासी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। मिलावटी खाद्य पदार्थों के सेवन से परहेज रखे। रंग खेलने से पूर्व त्वचा पर नारियल तेल व क्रीम लगाएं।
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महिलाएं भी बरतें सावधानियां
गोष्ठी में मौजूद उर्मिला देवी ने कहा कि युवतियां व महिलाएं रंग खेलते समय लंबे इयररिंग न पहनें। कांच की चूडिय़ों के साथ सावधानी बरते। नाखूनों पर नेल पालिश का प्रयोग करें। अधिक हील व प्लेटफार्म वाले फुटवियर का प्रयोग न करें।
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पानी की बर्बादी से भी बचें
रानी अवंतीबाई जूनियर हाईस्कूल के प्रबंधक जितेंद्र कुमार ने होली पर्व पर पानी की बर्बादी रोकने की अपील की। कहा कि रंगों को छुड़ाने के लिए अधिकांश जल बर्बाद किया जाता है। गुलाल व सूखी होली खेलने का प्रयास करें ताकि पानी की बर्बादी को रोका जा सके।
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आंखों का भी रखे ख्याल
नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. भ्रमरेश शर्मा ने कहा कि होली के दिन कांटेक्ट लैंस का प्रयोग न करें। यदि आंख का आपरेशन हुआ है या इलाज चल रहा है तो होली से दूर रहे। यदि रंग के कारण आंख में खुजली या चुभन है तो आंख को मसले नहीं और आंख को जबरदस्ती खोलने का भी प्रयास न करते हुए चिकित्सक से परामर्श लें।
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पशुओं का भी रखें ख्याल
पशु चिकित्सक डॉ. लक्ष्मी प्रसाद ने कहा कि पशुओं पर रंग न डालें। उन्हें एलर्जी हो सकती है। पशुओं के मुंह व आंखों में रंग पहुंचने से उन्हें तमाम दिक्कतें हो सकती हैं।
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सुनील-