स्थानीय मार्गों पर भटकते रहे यात्री, नहीं मिली रोडवेज बसें
पीलीभीत। यात्रियों की भीड़ बढ़ी तो पीलीभीत डिपो की व्यवस्थाएं धड़ाम हो गई। दिल्ली, जयपुर, रुद्रपुर, लखनऊ आदि शहरों से जिला मुख्यालय पहुंचने वाले यात्रियों को स्थानीय मार्गों पर बसों की सुविधा नहीं मिली। यात्रियों को डग्गामार व मालवाहक वाहनों से खतरे के बीच सफर करना पड़ा। कुछ मार्गों के यात्रियों को घंटों इंतजार के बाद रोडवेज बस मिली तो खड़े होकर सफर करना पड़ा। उधर, रेलवे स्टेशन पर भी यात्रियों की भीड़ उमड़ी।
सोमवार की दोपहर करीब 12.43 बजे शहर असम चौराहे पर एक भी रोडवेज बस नहीं दिखी। पूरनपुर मार्ग पर गोला, लखीमपुर, सीतापुर सहित अन्य जगहों पर तमाम यात्री बस का इंतजार कर रहे थे। सवारियां बसों के आने के समय की जानकारी करते नजर आईं। करीब एक घंटे के बाद गोला डिपो की बस पहुंची। सीट को लेकर यात्रियों में मारामारी दिखाई दी। कई यात्रियों ने बस में खड़े होकर सफर किया। बीसलपुर मार्ग पर भी यही नजारा दिखा। एआरएम विपुल पाराशर ने बताया कि स्थानीय मार्गों पर अतिरिक्त बसों की व्यवस्था की जा रही है। संवाद
डग्गामार और पिकअप से किया सफर
रोडवेज बस न मिलने पर कई यात्रियों ने डग्गामार वाहनों का सहारा लिया। चालकों ने यात्रियों की मजबूरी का फायदा उठाते हुए सामान्य दिनों से 10 रुपये तक अधिक किराया वसूला। बीसलपुर मार्ग के यात्रियों को 50 की जगह पर 60 से 70 रुपये किराया देना पड़ा। कई यात्री पिकअप में सवार होकर गंतव्य को रवाना हुए। यात्रियों ने अन्य मालवाहक वाहनों से भी सफर किया।
ट्रेन में सीट के लिए धक्का-मुक्की
शहर के नौगवां और असम चौराहे के साथ ही रेलवे स्टेशन पर भी यात्रियों की भीड़ उमड़ रही है। बाहर से आने वाले कामगारों के साथ ही स्थानीय लोग भी अपने घरों की वापसी कर रहे हैं। सोमवार की दोपहर करीब एक बजे त्रिवेणी एक्सप्रेस के स्टेशन पहुंचते ही यात्रियों में धक्का-मुक्की का नजारा दिखा। ट्रेन में सवार होने और सीट के लिए जद्दोजहद करनी पड़ी। इसके बाद भी यात्रियों को सीट नहीं मिल सकी। अन्य ट्रेनों में भी यही नजारा दिखा।
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सितारगंज में काम करते हैं। होली पर्व को लेकर गोला गोकर्णनाथ घर जा रहे हैं। करीब आधे घंटे से बस का इंतजार कर रहे है, लेकिन बस नहीं आई है। बस की जानकारी भी नहीं मिल पा रही है।- प्रेमपाल
रुद्रपुर में काम करते है। पर्व मनाने घर जा रहे हैं। काफी देर से चौराहे पर बस का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन बस नहीं आई है। अब किसी अन्य वाहन से सफर करना होगा।- करन
करन।
करन।
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