फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

ब्लैक स्पॉट पर जेबरा लाइन न साइन बोर्ड... जान देकर कीमत चुकाते हैं यात्री

विज्ञापन
विज्ञापन
पीलीभीत। जिले की सड़क पर हुआ ये हादसा पहला नहीं हैं। कभी चालक की लापरवाही तो कभी सिस्टम की नाकामी मगर हर बार आम लोगों ने इसकी कीमत अपनी जान देकर चुकाई है। शनिवार को हादसे में 11 मौतों के बाद बेशक हड़कंप मचा हो मगर हर बड़ी सड़क दुघर्टना के बाद मचने वाले हल्ले जैसा ही है। बाद में सब कुछ शांत हो जाता है। ट्रैफिक विभाग और पीडब्ल्यूडी से जुड़े अफसरों ने हाईवे और अन्य मार्गों पर दुघर्टनाओं वाली जगहों को ब्लैक स्पॉट तो घोषित कर दिया मगर खतरनाक मोड़ों पर एक्सीडेंट रोकने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए। ज्यादातर ब्लैक स्पॉट पर जेबरा लाइन, स्पीड ब्रेकर और साइन बोर्ड तक नहीं लगाए गए हैं।
विज्ञापन

जागरूकता के अभाव में वाहनों की रफ्तार और ट्रैफिक नियमों की जानकारी न होना राहगीरों की जिंदगी पर भारी पड़ रहा है। सड़क हादसे में हर साल सैकड़ों लोग जान अपनी गवांते हैं। तराई के छोटे से जिले पीलीभीत में सात साल में सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 2411 सड़क हादसे हुए। उन हादसों में 990 लोगों की जान चली गई जबकि 1865 लोग गंभीर रूप से घायल हुए। यह वह हादसे हैं, जो सरकारी आंकड़ों में दर्ज है वरना नियमों की अनदेखी और सड़कों पर सिस्टम की लापरवाही से रोजाना पांच से दस सड़क हादसे होते हैं।
सड़कों पर हैं 28 एक्सीडेंट जोन
हाईवे समेत प्रमुख मार्गों पर ट्रैफिक पुलिस, परिवहन और पीडब्ल्यूडी ने मिलकर 28 एक्सीडेंट जोन चिह्नित किए गए हैं मगर अब तक इन पर ट्रैफिक नियमों से जुड़े साइन बोर्ड नहीं लगे। यह भी सड़क हादसों का प्रमुख कारण है। जिन इलाकों में खतरनाक मोड़ ब्लैक स्पॉट बने हैं, वहां दुघर्टनाओं में कमी लाने के लिए काम नहीं किया। ब्लैक स्पॉट वाली जगहों पर अब भी यात्री सफर में अपनी जान गंवा रहे हैं। एक्सीडेंट जोन पांच साल की दुर्घटनाओं के आधार पर चिह्नित किए जाते हैं।
विज्ञापन

यह हैं पीलीभीत के 28 ब्लैक स्पॉट
गांव जिरौनिया, बजाज चीनी मिल बरखेड़ा, कस्बा बरखेड़ा, पतरासा, गाजीपुर मुगल, जोगीठेर, परसिया, भड़रिया मोड़, मुड़ैल कला, अकबरगंज गौटिया, जतीपुर, ललौरीखेड़ा, खमरिया पुल, शाही, नकटादाना चौराहा, यशवंतरी मंदिर चौराहा, न्यूरिया कस्बा, पूरनपुर, खमरिया पट्टी, चीनी मिल तिराहा, असम चौराहा से देवहा पुल, असम चौराहा से बरहा मोड़, पूरनपुर गेट चौकी, पीलीभीत में नेहरू पार्क से जिला अस्पताल, छतरी चौराहा से एलएच शुगर फैक्ट्री मोड़, असम हाईवे से बीसलपुर रोड़ प्रभा पैलेस, जगरौली एक्सीडेंट जोन हैं। अधिकतर जगहों पर ट्रैफिक से जुड़े साइन बोर्ड तक नहीं हैं।
ब्रेकर हादसों की वजह
यशवंतरी देवी मंदिर चौराहा ब्लैक स्पॉट है लेकिन यह सिर्फ कागजों में ही है। वर्तमान में चौराहे पर न साइन बोर्ड लगा है, न ही ऐसा कोई संकेत है , जिससे दुघर्टनाएं रुकें। ब्रेकर जरूर बना है मगर ये हादसे रोकता नहीं बल्कि हादसों की वजह बनता है। तीन दिन पहले ब्रेकर से निकलते वक्त बाइक से युवक गिरकर घायल हो गया था।
हादसे के बाद नहीं सुधरा खमरिया पुल
30 मार्च 2019 को बरेली हाईवे स्थित खमरिया पुल पर एक नेपाली टूरिस्ट बस और कार की आमने-सामने टक्कर हो गई थी। उसमें एक ही परिवार के पांच लोगों की जिंदा जलकर मौत हो गई थी। 27 जुलाई 2019 को खमरिया पुल पर ही उत्तराखंड की रोडवेज और कार टकराने से अलीगढ़ के छर्रा में रहने वाले एक ही परिवार के सात लोगों की मौत हो गई थीं। दोनों हादसों के बाद यह जगह ब्लैक स्पॉट बना दी गई। सिर्फ साइन बोर्ड लगाकर छोड़ दिया गया। यहां खतरनाक मोड़ होने से तेज रफ्तार वाहन अनियंत्रित होकर टकराते हैं। फिर वह बड़े हादसे बनते हैं।
गजरौला में भी पिछले साल हुआ था भीषण हादसा
गजरौला क्षेत्र के कटना पुल के पास 27 जुलाई 2019 को सुबह पांच बजे दो ट्रकों की टक्कर हुई थी। दूसरा ट्रक सड़क पर खराब होकर खड़ा था। हादसे में शहर के नौगंवा पकड़िया निवासी साले बहनोई के साथ गांव के अन्य युवक की मौत हो गई थी। जगह ब्लैक स्पॉट घोषित हुई, मगर किसी तरह सुधार नहीं किया गया। यहां खतरनाक मोड़ है। कभी भी हादसा होने का डर रहता है। माला कॉलोनी का मोड़ भी खतरनाक है। यहां अचानक वाहन सामने आ जाते हैं और हादसे की वजह बनते हैं। इस ब्लैक स्पॉट पर कोई भी काम नहीं कराया गया।
ट्रैफिक नियमों की जागरूकता का अभाव
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वाहन चालक यातायात नियमों को लेकर लापरवाही बरती जाती है। सुरक्षित सफर की बात तो हर कोई करता है, मगर, खुद गंभीरता नहीं बरतना चाहता। बिना हेलमेट बाइक चलाना, ट्रिपल राइडिंग करना तो जैसे बाइकर्स का शौक है। ओवरटेक करते वक्त भी सावधानी नहीं बरतते। यह कई बार हादसों में अहम वजह बनता है। वाहन चलाते वक्त बिना संकेत अचानक उन्हें मोड़ देना, गलत दिशा में गाड़ी चलाना, स्पीड नियंत्रित न होना भी दुघर्टना को बढ़ावा देता है।
प्रतिदिन करीब 150 चालान
यातायात और थाना पुलिस की ओर से रोजाना 150 चालान किए जाते हैं। चालकों से लाखों का जुर्माना भी पुलिस वसूलती है, मगर दुघर्टनाएं कम नहीं होती। शराब पीकर वाहन चलाने और स्पीड मीटर के नियमों का उल्लंघन पर पुलिस कभी गौर नहीं करती। पूरा जोर केवल हेलमेट न लगाने पर है।
हर साल बढ़ रहा हादसों में मरने वालों की संख्या
वर्षं - हादसे - घायल - मृतक
2014 - 370 - 249 - 136
2015 - 345 - 256 - 126
2016 - 376 - 287 - 155
2017 - 409 - 314 - 166
2018 - 355 - 235 - 161
2019 - 436 -314 - 168
2020 - 120 -210 - 78
‘सड़क हादसों की अहम वजह वाहन चालकों में ट्रैफिक सेंस की कमी और यातायात नियमों के प्रति जागरूकता का अभाव है। जागरूकता के कार्यक्रम भी होते हैं। वाहन चालकों को जिम्मेदारी समझनी होगी। तभी दुघर्टनाओं की संख्या को कम किया जा सकता है।’ - अमिताभ राय, एआरटीओ
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें