20 साल से खुद तैयार कर रहे जैविक खाद व कीटनाशक
धान्य, बागवानी, औषधीय, पशुपालन के साथ मशरूम, रेशम उत्पादन भी अपनाया
साधारण से दिखने वाले किसान रामऔतार की पहचान जिले में प्रगतिशील किसान के रूप में है। अपनी मेहनत, लगन और विभागीय सहयोग से वह खुद में एक कृषि विश्वविद्यालय बन चुके हैं। पिछले 20 वर्षों से खुद की जैविक खाद एवं कीटनाशक तैयार कर वह अपने 18 बीघा के खेत में फल, सब्जी, गेहूूं, धान के अलावा औषधीय खेती, मशरूम उत्पादन और रेशम कीट का पालन भी कर रहे हैं। विभिन्न कृषि मेले, प्रदर्शनी एवं प्रतियोगिताओं में वह 40 से अधिक प्रमाणपत्र हासिल कर चुके हैं। साथ ही नाबार्ड के सहयोग से उन्होंने मशरूम उत्पादक कंपनी भी प्रारंभ की है।
1976 में किया कृषि से स्नातक
बरखेड़ा ब्लॉक के गांव फूटा कुआं निवासी किसान रामऔतार ने वर्ष 1976 में पंतनगर कृषि विद्यालय से कृषि स्नातक की पढ़ाई की। एमएसपी कृषि में भी प्रवेश लिया, लेकिन पिता के निधन के चलते पढ़ाई छोड़कर घरबार संभालना पड़ा। प्रारंभ में घर के पुस्तैनी काम सब्जी उत्पादन में लगे लेकिन कुछ अलग कर गुजरने की चाहत व नये प्रयोग से वह गांव ही नहीं जिले में मिसाल बने हुए हैं।
खुद तैयार करते हैं जैविक खाद
20 सालों से खेती कर रहे रामऔतार ने रासायनिक खाद व कीटनाशकों का प्रयोग ही नहीं किया बल्कि घर पर ही गोबर से कंपोस्ट, वर्मी कंपोस्ट, नीम व गोमूत्र से कीटनाशी तैयार कर प्रयोग करते हैं। मशरूम का उत्पादन शुरू करने के कुछ दिनों बाद ही उन्होंने नाबार्ड की मदद से गत वर्ष मशरूम उत्पादक कंपनी बनाई है। आज वह बटन मशरूम के साथ मशरूम को सुखाकर भी बेचते हैं। अकेले मशरूम से ही वर्ष में 3-4 लाख रुपये कमा लेते हैं।
पहले मजाक उड़ाते थे अब कर रहे अनुसरण
रामऔतार ने बताया कि प्रारंभ में उनकी खेती और इसके तरीके देखकर लोग मजाक करते थे। दोनों बेटे भी हाथ बटाने से बचते थे, लेकिन अब जहां दोनों बेटे नंदकिशोर व महिपाल कंधे से कंधा मिलाकर साथ चल रहे हैं वहीं गांव के अलावा आसपास के लोग भी उनकी सराहना और अनुकरण कर रहे हैं।
जहर मुक्त भोजन, आक्सीजन युक्त जीवन ही उद्देश्य
अपनी मेहनत से खेत को अनुसंधान केंद्र बना देने वाले रामऔतार का जीवन आज भी सादा है। आज भी वह साइकिल से ही चलते हैं। जमीन से हुई आमदनी से घर बनवाने से पहले उन्होंने गांव में ही महादेव का मंदिर बनवाया। उन्होंने बताया कि खेती मेहनत और लगन मांगती है। खुद लगना पड़ता है। जहर मुक्त भोजन और आक्सीनयुक्त जीवन सभी को मिले यही उनका उद्देश्य है।
बागवानी
पीपल, नीम, बरगद के साथ आम, अमरूद, पपीता, लीची, कटहल, चीकू, चकोतरा, आडू, शरीफा, पापुलर, बांस, यूकेलिप्टस, सागौन व शीशम के पेड़ हैं।
औषधीय पौधे
सतावर, सर्पगंधा, अश्वगंधा, कालमेघ, पीपली, अडूसा, सफेद मूसली, हल्दी, अदरक, काली हल्दी, सोंठ, स्टीबिया, मुलैठी आदि।
अन्य फसलें
धान, गेहं, गन्ना, घुइैया, आलू, लौकी, करेला, बैगन, हरी मिर्च, लहसुन, प्याज आदि।
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