फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Pilibhit News: वर्षाकाल बीता, नदियों की तबाही रोकने को गंभीर नहीं सिंचाई विभाग

विज्ञापन
सीमावर्ती क्षेत्र में जगबूड़ा नदी के कटान से क्षतिग्रस्त मार्ग।फाइल फोटो
विज्ञापन
कलीनगर। बरसात का समय निकल गया, लेकिन शारदा नदी की बाढ़ से होने वाली तबाही को रोकने के लिए सिंचाई विभाग अब तक कोई कार्ययोजना नहीं बना सका। बारिश और बाढ़ से कटे रास्तों की मरम्मत भी नहीं हो सकी। ग्रामीण परेशान हैं। कहना है कि समय रहते ठोस योजना पर अमल नहीं हुआ तो आने वाले समय में तबाही और बढ़ जाएगी।
विज्ञापन


कलीनगर तहसील क्षेत्र के सीमावर्ती इलाके के नोमेंस लैंड से शारदा नदी भारतीय क्षेत्र में प्रवेश करती है। नोमेंस लैंड पर जगबूड़ा और सनेडी नदी शारदा में मिलकर हर साल तबाही मचाती हैं। तीनों नदियां मिलकर सीमावर्ती गांव बूंदीभूड़, बंदरबोझ, नौजल्हा नंबर एक और दो गांव के आबादी क्षेत्र में अधिक नुकसान पहुंचाती हैं।
बरसात में भी शारदा नदी में आई बाढ़ ने कई गांवों की सीमा में नुकसान किया। बाढ़ नियंत्रण योजनाएं भी प्रभावित हुईं। अब वर्षाकाल समाप्त हो चुका है, मगर सिंचाई विभाग के शारदा सागर खंड और बाढ़ खंड की ओर से बचाव की दिशा में कोई कार्ययोजना नहीं बनाई जा सकी है।
विज्ञापन


नेपाल सरकार ने बनाए तटबंध, भारतीय क्षेत्र में बढ़ा नुकसान
ग्रामीणों का कहना है कि नेपाल सरकार ने अपने क्षेत्र में तटबंध बना लिए, ऐसे में भारतीय क्षेत्र में तटबंध न बनने से नदी से नुकसान बढ़ने लगा है। डीएम के निर्देश पर पिछले दिनों अभियंताओं की टीम ने क्षेत्र का दौरा किया, लेकिन योजना बनाने पर अमल नहीं हो सका। ग्रामीणों का आरोप है कि अभियंता जिला प्रशासन को गुमराह करते हैं। उनका कहना है कि शारदा खंड की ओर मार्जिनल बांध को चौड़ा और ऊंचा कराने का कार्य किया जा रहा है। ऐसे में इन गांवों में खतरा और भी बढ़ जाएगा। नेपाल की नदियों का पानी आसानी से शारदा नदी में प्रवेश न कर जाए, इसको लेकर ठोस कार्ययोजना बनाने की जरूरत है।



अस्थायी कार्य के नाम पर लगाया जाता है बजट ठिकाने
ग्रामीणों का कहना है कि शारदा नदी लंबे समय से नुकसान पहुंचाती आ रही है। पूर्व में कई ठोस योजनाएं बनीं। इससे कई गांवों में बाढ़ का खतरा टल गया, लेकिन नोमेंस लैंड के निकट बसे तीन गांवों में नेपाल की नदियों का खतरा बना रहता है। इसे रोकने के नाम पर विभाग की ओर से सिर्फ अस्थायी कार्य कराकर बजट ठिकाने लगाने पर जोर दिया जाता है। कहना है कि पूर्व में डीएम ने मामले को गंभीरता से लिया, लेकिन अफसर गलत फीडबैक देकर जिला प्रशासन को गुमराह कर रहे हैं।


डीएम के निर्देश पर सिंचाई विभाग के अभियंताओं के साथ जाकर पूर्व में सीमावर्ती क्षेत्र में स्थिति को परखा गया था। नेपाल की ओर अपने क्षेत्र में कराए गए कार्यों के बाबत भी चर्चा की गई। इस मामले में अब अभियंताओं से फिर रिपोर्ट ली जाएगी।
विज्ञापन

- देवेंद्र सिंह, एसडीएम कलीनगर
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें