बरेली से मंगवाता था खाली शीशियां
पुलिस की जांच में सामने आया कि आरोपी बरेली से खाली शीशियां मंगवाता, उनमें घोल भरा जाता और ब्रांड के स्टीकर पूरनपुर के एक पेंटिंग प्रेस से छपवाए जाते थे। लेमिनेशन कर शीशियों को इस कदर चमकाया जाता कि असली और नकली में फर्क करना आम आदमी के लिए नामुमकिन हो जाए। नियम-कानून कागजों में सख्त थे, लेकिन जमीन पर यह कारोबार बेखौफ फलता-फूलता रहा। एएसपी विक्रम दहिया ने बताया कि मामले में पूरनपुर सर्किल पुलिस गहनता से कार्य कर रही है। हर पहलु पर जांच को आगे बढ़ाया जा रहा है।
पुलिस के रडार पर तीन मेडिकल स्टोर और प्रिंटिंग प्रेस संचालक
पूरनपुर सर्किल पुलिस ने क्षेत्र के तीन मेडिकल स्टोरों को ट्रेस कर लिया है और रैपर छापने वाली पेंटिंग प्रेस को भी चिह्नित कर नोटिस जारी किया गया है। मेडिकल स्टोरों में एक शेरपुर और दो पूरनपुर नगर के शामिल हैं। नोटिस के जवाब के बाद इन पर भी कार्रवाई हो सकती है।
पुलिस की सूचना पर भी सब कुछ ठीक होने का दावा
सबसे बड़ा सवाल औषधि विभाग की भूमिका पर खड़ा हो गया है। दो साल तक गांव-गांव और मेडिकल स्टोरों से नकली कफ सिरप बिकता रहा, लेकिन विभाग को इसकी भनक तक नहीं लगी। बताया जा रहा है कि पुलिस के सूचना देने पर भी औषधि निरीक्षक ने सब कुछ ठीक होने का दावा कर मामले को हल्का करने की कोशिश की। अगर पुलिस सिर्फ सरकारी जवाबों पर भरोसा कर लेती तो शायद यह जहरीला कारोबार आज भी जारी रहता। यह भी चर्चा है कि औषधि विभाग के निरीक्षण से पहले ही अधिकतर मेडिकल स्टोरों के शटर गिर जाते हैं।