पीलीभीत। रूस-यूक्रेन की जंग के चलते भारत को गेहूं के निर्यात में मौका मिला है। भारत ने जबरदस्त एंट्री मारी है। मिनी पंजाब कहे जाने वाले तराई के पीलीभीत जिले से 78 हजार मीट्रिक टन (एमटी) गेहूं दुनिया के कई देशों में निर्यात किया जाएगा। व्यापारियों को इसके लिए डिमांड मिल गई है।
मंडी में तेजी के साथ खरीदारी शुरू हो चुकी है। खुले बाजार में 2000-2050 रुपये प्रति क्विंटल का भाव किसानों को मंडी में मिल रहा है। सरकारी खरीद केंद्रों पर 2015 रुपये प्रति क्विंटल का भाव है। इसलिए किसान सरकारी क्रय केंद्रों से मुंह मोड़ रहे हैं। असर सरकारी खरीद पर जरूर पड़ रहा है, लेकिन किसानों की बल्ले-बल्ले है। जिले से निर्यात के लिए रैक लोड होना शुरू हो गया है। गुरुवार रात को 26 हजार क्विंटल की पहली रैक कांडला पोर्ट गुजरात के लिए रवाना हुई। जिले से एक महीने में करीब 30 रैक के जरिए 78,000 मीट्रिक टन गेेहूं विदेश भेजने की तैयारी है।
जिले में 148 सरकारी क्रय केंद्रों पर एमएसपी 2015 रुपये प्रति क्विंटल पर खरीद हो रही है। शासन ने 2.3 लाख मीट्रिक खरीद का लक्ष्य रखा है। वहीं अभी तक सरकारी क्रय केंद्रों पर 2010 एमटी ही खरीद हो सकी है। दूसरी तरफ बाजार में किसानों को 2000 रुपये प्रति क्विंटल से अधिक का भाव मिल रहा है। शुक्रवार को शहर की मंडी में अधिकतम 2030 रुपये प्रति क्विंटल का भाव में गेहूं बिका। शहर के गल्ला व्यापारियों के अनुसार रूस से निर्यात बंद होने के बाद विदेशों में भारतीय गेहूं की मांग बढ़ी है। बड़े व्यापारी रैक से गेहूं कांडला पोर्ट गुजरात भेज रहे हैं। वैसे जिले से हर साल गेहूं बाहर भेेजा जाता है, लेकिन इस बार पहली बार रैक से और वो भी इतनी बड़ी मात्रा में गेहूं निर्यात किया जा रहा है। एक 10 रैक में 26 हजार क्विंटल गेहूं जाता है इस हिसाब से करीब 78 हजार एमटी गेहूं निर्यात किया जाएगा। पीलीभीत रेलवे जंक्शन से गुरुवार को एक रैक रवाना हुई और बाकी रैक भी भेजी जाएगी। किसानों को अपनी फसल की अच्छी कीमत मिल रही है इसलिए सरकारी केंद्रों के बजाए वह मंडी में अपना गेहूं बेच रहे हैं।
रूस से निर्यात नहीं हो रहा, इस वजह से भारत से निर्यात की मांग बढ़ी है। पीलीभीत से रैक जा रही हैैं। पहली रैक रवाना हो गई है। निर्यात होने से किसानों को गेहूं की अच्छी कीमत मिल रही है। बड़े निर्यातक जिले से गेहूं खरीद रहे हैं। - सचिन सिंह, गल्ला व्यापारी मंडी
विदेशों में निर्यात बढ़ने से गेहूं की मांग में उछाल आया है। जिले का गेहूं तो पहले भी विदेशों में जाता था लेकिन इस बार रूस और यूक्रेन जंग के चलते मांग बढ़ी है। मांग बढ़ने से किसानों को फसल की कीमत भी अच्छी मिल रही है। - राघव अग्रवाल, गल्ला व्यापारी मंडी
मंडी में 200 क्विंटल गेहूं बेचा है। 2030 का भाव मिला है। कीमत तो अच्छी मिली है, लेकिन इस बार गेहूं कम निकल रहा है। मेरा गेहूं इस बार 15 से 18 क्विंटल प्रति एकड़ निकला जबकि पिछली बार 20 से 25 का निकला था। - चरण जीत सिंह, पचपेड़ा पूरनपुर
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गेहूं इस बार बहुत कम निकल रहा है। बारिश हो गई उस वजह से गेहूं पतला हो गया। हवा चलने से फसल भी लेट गई थी। कीमत तो अच्छी मिल रही है, लेकिन मुनाफा तो कम हो गया। मेरा गेहूं 20 से 25 का निकलता था इस बार 15 से 18 क्विंटल प्रति एकड़ निकल रहा है। - हरेंद्र सिंह, न्यूरिया सुल्तानपुर
27 बीघा गेहूं था। 50 क्विंटल निकला है जबकि पिछले साल 65 क्विंटल निकला था। मंडी में कीमत तो अच्छी है, लेकिन उत्पादन पहले की तरह होता तो किसानों को ज्यादा फायदा होता। बारिश ने काफी फर्क डाला। -इम्तियाज अहमद, अमरिया
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जनवरी और फरवरी में बारिश होने से गेहूं की फसल पर तो असर पड़ा है। गेहूं में ज्यादा दिन तक पानी भरा रहे तो फसल सूख जाती है। गेहूं की बाली निकली हुई थी उस वक्त बारिश हुई। इससे गेहूं पतला हो गया। औसत माने तो पैदावार पर 15 फीसद तक असर पड़ा है।
-डॉ. एसएस ढाका, मौसम विज्ञानी
सरकरी केंद्रों पर आवक शुरू हो गई है। शुक्रवार तक 2010 एमटी गेहूं की खरीद हो चुकी है। बाजार में कीमत अच्छी है इस वजह से फर्क तो पड़ रहा है। फिलहाल किसानों केे जागरूक किया जा रहा है। धीरे-धीरे सरकारी खरीद तेजी पकड़ रही है। इस बार 2.30 लाख एमटी का लक्ष्य है। अब देखते हैं कितनी खरीद हो पाती है।
- ज्ञानचंद्र वर्मा , डिप्टी आरएमओ
डीएम ने दिए खरीद बढ़ाने के निर्देश
डीए पुलकित खरे ने जिले में गेहूं खरीद तेज करने के निर्देश दिए। सभी एसडीएम को निर्देशित किया कि वह अपने क्षेत्रों में किसानों को जागरूक करें ताकि सरकारी खरीद तेजी पकड़ सके।