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Pilibhit News: अल्ट्रासाउंड सेवा न होने से गर्भवती परेशान

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माधोटांडा का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र।फाइल फोटो
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पीलीभीत। नेपाल सीमा से सटे 30 गांवों के ग्रामीणों को स्वास्थ्य सेवाएं देने वाली माधोटांडा सीएचसी अव्यवस्थाओं से जूझ रही है। अल्ट्रासाउंड सेवा न होने से यहां आने वाली गर्भवती महिलाओं को पूरनपुर या फिर जिला मुख्यालय तक दौड़ लगानी पड़ रही है।
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वर्ष 2016 में करीब सात करोड़ रुपये की लागत से माधोटांडा सीएचसी के भवन का निर्माण कराया गया था। भवन तैयार होने के बाद अस्पताल को शिफ्ट भी कर दिया गया, लेकिन सीएचसी में मानक के अनुसार स्टाफ और व्यवस्थाओं को दुरुस्त नहीं किया जा सका।
व्यवस्थाओं की बात की जाए तो सीएचसी में एक चिकित्सक तैनात हैं। वह भी पोस्टमार्टम समेत अन्य ड्यूटी के चलते सप्ताह में तीन दिन ही आते हैं।
इसके अलावा एक फार्मासिस्ट भी है। खून की जांच का जिम्मा पूरनपुर सीएचसी के लैब टेक्नीशियन ही संभालते हैं। एक मात्र सीएचसी होने से 30 से अधिक गांव के ग्रामीणों का यहां इलाज के लिए आते हैं। उन्हें बुखार सर्दी, जुकाम, खुजली आदि सामान्य समस्याओं से संबंधित दवा दे दी जाती है।
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गंभीर स्थिति होने पर पूरनपुर या जिला अस्पताल रेफर किया जाता है। हादसों समेत अन्य स्थिति में फ्रैक्चर होने या अल्ट्रासाउंड करने की स्थिति में भी मरीजों को मायूस होकर लंबी दूरी तय करना पड़ती है। प्रभारी चिकित्सक डॉ. राकेश कुमार ने बताया कि मामले की जानकारी अधिकारियों को दे दी गई है। हालांकि अभी महिलाओं को पूरनपुर भेजा रहा है।


भवन के अधिकतर कमरे पड़े हैं खाली
सीएचसी के नए भवन में व्यवस्थाएं अधूरी होने से अधिकतर कमरे खाली पड़े हैं। एक्स-रे और अल्ट्रासाउंड कक्ष के बाहर ताले पड़े हैं, जबकि प्रथम तल का अब तक कोई इस्तेमाल ही नहीं किया जा सका है। द्वितीय तल पर कोविड वार्ड बनाया गया है। क्षेत्रीय लोगों की लगातार मांग के बाद भी हालात नहीं सुधारे जा सके हैं।
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