इको समिति की ओर से बनाए जा रहे पेड़े। स्रोत : विभाग
पीलीभीत। अब पीलीभीत टाइगर रिजर्व अपनी नई पहल के तहत मिठाई (डेजर्ट) ब्रांडिंग की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। विश्व प्रकृति निधि के सहयोग से पीटीआर जंगल से सटे ग्रामीणों की आजीविका बढ़ाने के प्रयासों में जुटा है। इसी क्रम में लालपुर गांव में गठित इको विकास समिति (ईडीसी) के माध्यम से ग्रामीणों ने शुद्ध मावे से तैयार पेड़े बनाना शुरू किया है। इस कार्य में लगभग 50 प्रतिशत महिलाएं भी सक्रिय भागीदारी निभा रही हैं।
पीटीआर प्रशासन ने ग्रामीणों की आय बढ़ाने और स्थानीय उत्पादों को पहचान दिलाने के लिए इन पेड़ों की बिक्री के लिए प्लेटफार्म तैयार किए हैं। इसके तहत पीलीभीत टाइगर रिजर्व के प्रमुख इको-टूरिज्म स्थलों चूका बीच, सप्त सरोवर, महोफ, मुस्तफाबाद और बराही पर्यटन गेट पर पेड़ा बिक्री के काउंटर स्थापित किए जा रहे हैं। इन स्थलों पर देश-विदेश से सैलानी पहुंचते हैं, जिससे लालपुर के पेड़े को व्यापक पहचान मिलने की संभावना है। डीएफओ मनीष सिंह का कहना है कि भविष्य में लालपुर ईडीसी के माध्यम से शुद्ध देसी घी के उत्पाद भी बाजार में उतारने की योजना है। उन्होंने कहा कि यह पहल न केवल ग्रामीणों की आय बढ़ाने में मददगार होगी बल्कि पर्यटन के माध्यम से स्थानीय परंपराओं को भी नई पहचान मिलेगी। विश्व प्रकृति निधि के वरिष्ठ परियोजना अधिकारी नरेश कुमार ने बताया कि विश्व प्रकृति निधि पीटीआर के सहयोग से जंगल से सटे गांवों के विकास एवं वहां के लोगों को आजीविका में सहयोग देने की दिशा में कार्य कर रहा है। इसी कड़ी में लालपुर ईडीसी के माध्यम से तैयार पेड़े को बिक्री के लिए उतारा गया है, ताकि ग्रामीणों की आय में वृद्धि हो सके। जंगल से सटे अन्य गांवों को भी इस योजना से जोड़ने की रूपरेखा तैयार की जा रही है। इस कार्य में महिलाओं की भी बेहतर भागीदारी है।