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Pilibht News: विहिप के संगठन मंत्री प्रिंस गौड़ को न्यायालय से मिली जमानत, इस मामले में दर्ज हुआ था मुकदमा

Tue, 11 Nov 2025 07:55 PM IST
मुकेश कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत

सार

विहिप के संगठन मंत्री प्रिंस गौड़ के खिलाफ एडीएम वित्त एवं राजस्व ऋतु पूनिया ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसके बाद पुलिस ने प्रिंस गौड़ को गिरफ्तार किया। कोर्ट से उन्हें जेल भेजा गया था। कुछ घंटों के बाद तबीयत बिगड़ने के बाद उनको जेल से जिला अस्पताल ले जाकर भर्ती कराया गया था।
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विहिप पदाधिकारी प्रिंस गौड़ - फोटो : संवाद
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विस्तार
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पीलीभीत में विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के संगठन मंत्री प्रिंस गौड़ को मंगलवार को राहत मिली है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मंगलदेव सिंह ने सुनवाई के बाद जमानत अर्जी स्वीकार कर ली। न्यायालय से देर शाम औपचारिकताएं पूरी करने के बाद रिहाई का आदेश जारी किया गया।

एडीएम वित्त एवं राजस्व ऋतु पूनिया ने बीते शुक्रवार को सदर कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसमें विहिप के संगठन मंत्री प्रिंस गौड़ पर आरोप लगाकर न्यायिक एवं प्रशासनिक कार्यों में व्यवधान डालने, शासकीय छवि और सामाजिक प्रतिष्ठा पर कुठारा घात करने के अलावा जान का खतरा भी जताया था।

कोतवाली पुलिस ने शनिवार को संगठन मंत्री को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया था जहां से न्यायिक अभिरक्षा में जेला भेजा गया था। उसी दिन जेल जाने के कुछ घंटों के बाद तबीयत बिगड़ने के बाद संगठन मंत्री को जिला अस्पताल ले जाकर भर्ती कराया था। इधर आरोपी पक्ष ने जमानत याचिका न्यायालय में दाखिल की थी।

बीमार होने के चलते प्रिंस को नहीं किया जा सका पेश

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मामले में सोमवार को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने संगठन मंत्री को न्यायालय में पेश करने का आदेश जारी कर मंगलवार को सुनवाई करने के आदेश दिए थे। मंगलवार को सुबह से ही न्यायालय में विहिप के कार्यकर्ताओं की चहल पहल रही। दोपहर बाद सुनवाई हुई। बीमार होने के चलते संगठन मंत्री को न्यायालय में पेश नहीं किया जा सका।

जेल भेजा गया रिहाई का आदेश
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने याचिका पर सुनवाई के दौरान पुलिस ने न्यायालय में अर्जी देकर प्रिंस गौड़ पर लगी गंभीर धाराओं को हटाने का अनुरोध किया, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया। इसके बाद जमानत अर्जी पर विचार करते हुए न्यायालय ने आरोपी को निजी मुचलका और दो जमानती दाखिल करने की शर्त पर रिहा करने का आदेश दिया। आवश्यक औपचारिकताएं पूरी होने के बाद रिहाई आदेश जिला जेल भेज दिया।

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