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2.5 साल बाद है यूपी में चुनाव, इसलिए भाजपा ने युवा चेहरे संजीव पर लगाया दांव

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पीलीभीत। यूपी विधानसभा चुनाव होने में अभी 2.5 साल बाकी हैं। मगर, भाजपा ने अभी से तैयारी शुरू कर दी है। आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर संगठन में नई जान फूंकने के लिए भाजपा ने जिलाध्यक्ष पद पर इस बार 39 साल के युवा चेहरे संजीव प्रताप सिंह पर दांव लगाया है। संजीव प्रताप ने जिलाध्यक्ष पद के प्रबल दावेदार गुरुभाग सिंह को अंतिम क्षणों में इस दौड़ से पछाड़ते हुए जिलाध्यक्ष की कुर्सी हासिल कर ली। माना जा रहा है कि संजीव प्रताप सिंह को जिलाध्यक्ष बनने के पीछे भाजपा प्रदेश संगठन मंत्री सुनील बंसल और बृज क्षेत्र संगठन मंत्री भवानी सिंह का आशीर्वाद भी काम आया। ऐन वक्त पर गुरुभाग सिंह का पत्ता कट गया। भाजपा ने कैडर और मेहनत को तरजीह देते हुए संजीव प्रताप को जिले की कमान सौंप दी।
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यूपी-उत्तराखंड के बॉर्डर पर बसे छोटे से कस्बे मझोला के रहने वाले किसान स्व. सुरेश सिंह और गृहणी मां भागीरथी सिंह के मझले बेटे संजीव प्रताप सिंह एबीवीपी से लंबे समय तक जुड़े रहे। वह वर्ष 2000-2002 में गाजियाबाद के महानगर संगठन मंत्री और 2002-03 में एबीवीपी के एटा में जिला संगठन मंत्री रह चुके हैं। इनको वर्ष 2003-05 में आगरा विश्वविद्यालय में विभाग संगठन मंत्री भी बनाया गया। वर्ष 2006-08 तक भाजयुमो प्रदेश कार्यकारिणी के सदस्य रहे। फिर पीलीभीत लौट आए और यहां 2008-14 तक भाजपा के जिला मंत्री रहे। भाजपा ने वर्ष 2014 में जिला महामंत्री बनाया। जिलाध्यक्ष बनने से पहले तक जिला महामंत्री थे। सरस्वती शिशु मंदिर और सरस्वती विद्या मंदिर में पढ़े संजीव प्रताप का शुरू से ही भाजपा और उसके अनुशांगिक संगठनों के प्रति झुकाव रहा। संजीव प्रताप सिंह ने एमकॉम और एलएलबी होने के साथ राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ में तृतीय वर्ष का प्रशिक्षण भी प्राप्त किया है। संजीव का भाजपा जिलाध्यक्ष बनना चौंकाने वाला रहा क्योंकि यहां निवर्तमान जिलाध्यक्ष राकेश गुप्ता के अलावा पूरनपुर के फार्मर गुरुभाग सिंह को इस पद का प्रबल दावेदार माना जा रहा था। सूत्रों के मुताबिक कार्यकर्ताओं के भारी समर्थन के अलावा बृज क्षेत्र संगठन मंत्री भवानी सिंह और प्रदेश संगठन मंत्री सुनील बंसल के मार्गदर्शन में लंबे समय तक संगठन में काम करने का इनाम पार्टी ने उनको जिलाध्यक्ष बनाकर दिया।
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