पीलीभीत। पड़ोसी जनपद बरेली में भाजपा के वर्तमान विधायकों के टिकट कटे तो पीलीभीत में ऐसे दावेदार उत्साहित नजर आए जो लंबे समय से विधायकों के सामने अपनी दावेदारी करते आ रहे हैं। इन दावेदारों को जिले में भी बदलाव की उम्मीद नजर आ रही है। यह बात दीगर है कि नेतृत्व ने अभी तक स्थिति साफ नहीं की है। न तो सिटिंग विधायकों का टिकट पक्का किया है और न ही उनके स्थान पर किसी और उम्मीदवार को हरी झंडी दिखाई है।
जिले के भाजपा नेताओं और टिकट के दावेदारों की लखनऊ की ओर निगाहें लगी हैं। पल-पल खबर ले रहे हैं। वहीं कुछ दावेदार लखनऊ में लगातार डेरा जमाए हैं। हर रोज पार्टी के नेताओं से मिल रहे हैं। संघ के पदाधिकारियों के घर भी दस्तक दे रहे हैं। जबकि अपना टिकट बरकरार रखने के लिए विधायकगण लखनऊ से दिल्ली तक की दौड़ लगा रहे हैं। अपना रिपोर्ट कार्ड साथ में रखते हैं। विरोधियों के सवालों का जवाब भी दे रहे हैं। नेतृत्व की शंकाओं का भी समाधान कर रहे हैं। निजी कंपनी के सर्वे में आए ब्योरे के आधार पर विधायकों से सवाल पूछे जा रहे हैं। इन सवालों का भी जवाब बड़ी सावधानी के साथ विधायक गण दे रहे हैं ताकि हर हालत में एक बार फिर उम्मीदवारी को हरी झंडी मिल जाए।
सदर क्षेत्र में विधायक संजय गंगवार समेत नौ दावेदार
नगर विधायक संजय गंगवार अपने टिकट के लिए विधायक लखनऊ से दिल्ली तक की दौड़ लगा रहे हैं। विधायक के अलावा पूर्व प्रत्याशी सत्यपाल गंगवार की दावेदारी है। वह 2012 में भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ चुके हैं हैं। पूर्व जिलाध्यक्ष राकेश गुप्ता अहम दावेदार हैं। वह तीन बार जिलाध्यक्ष रह चुके हैं। डा. वीरेंद्र सिंह, प्रशांत पटेल, रेखा सिंह परिहार, अंकुर गुप्ता, रमेश लोधी भी दावेदारों की सूची में हैं। अंकुर गुप्ता, शहर से विधायक रहे दिवंगत बीके गुप्ता के बेटे हैं।
भाजपा का गढ़ है बरखेड़ा, नए दावेदार भी मांग रहे टिकट
बरखेड़ा सीट भाजपा का गढ़ मानी जाती है। विधायक किशनलाल राजपूत एक बार अपनी उम्मीदवारी को लेकर आश्वस्त हैं. लेकिन अभी टिकट का एलान नहीं हुआ है। जिले की सीटों के लिए तीन-चार दिन में टिकट घोषित होने की उम्मीद है। मी प्रवक्तानंद, रामनरेश वर्मा, देवेंद्र वर्मा, अनिल सक्सेना, महेश योगी, रविंद्र प्रताप सिंह, डाल चंद्र वर्मा, किशोर तरफदार, सपन विश्वास की दावेदारी सामने है।
विधायक के टिकट के लिए चुनौती खड़ी कर रहे है अपने ही दल के लोग
पूरनपुर से विधायक बाबूराम पासवान की फिर से उम्मीदवारी है। जातिगत समीकरण और अपने काम का हवाला देकर वह अपनी दावेदारी को सबसे मजबूत मानते हैं जबकि उनकी ही पार्टी के कुछ पदाधिकारी नए दावेदारों का साथ दे रहे हैं। फिर भी विधायक नेतृत्व से हरी झंडी मिलने का इंतजार है। जबकि नए दावेदारों का मानना है कि पार्टी बदलाव कर सकती है। इस बीच दोनों तरफ से लखनऊ में मौजूद नेताओं से लगातार संपर्क किया जा रहा है। नए दावेदारों में सुषमा देवी, लेखराज भारती, अशोक राजा, दीप्ती वर्मा, अमित संघर्षी, आरपी सिंह, भास्कर भारती भी टिकट के दावेदार के रूप में सामने आए हैं।
बीसलपुर में विधायक रामसरन वर्मा समेत कुल दस दावेदार हैं। विवेक वर्मा विधायक के बेटे हैं। अगर पार्टी ने विधायक की उम्र को देखते हुए बदलाव का मन बनाया तो बेटे की दावेदारी पर विचार हो सकता है। नेतृत्व उनके बेटे के प्रति गंभीर है। लेकिन अभी कोई फैसला नहीं हो सका है। उनके बेटे के अलावा सुरेश गंगवार की अहम दावेदारी है। वह जिलाध्यक्ष रह चुके हैं। प्रदेश स्तर की राजनीति में सक्रिय हैं। रत्नेश गंगवार, राकेश गंगवार, नरेश शर्मा, हरिओम अवस्थी, रविशरण सिंह, महीपाल सिंह, धर्मेंद्र चौहान, संजीव सरन शर्मा की भी दावेदारी है।