कंस्ट्रक्शन एंड डिजाइन सर्विसेज यूपी जल निगम करेगी निर्माण
1.20 करोड़ रुपये का स्टीमेट तैयार, मुख्यालय भेजी गई फाइल
क्राइम ब्रांच को बेहतर बनाने के लिए संसाधन जुटाने की कवायद तेज हो गई है। इसके लिए आधुनिक सुविधाओं से युक्त प्रशासनिक भवन बनाया जाएगा। निर्माणदायी संस्था कंस्ट्रक्शन एंड डिजाइन सर्विसेज यूपी जल निगम की टीम ने स्थलीय मुआयना कर 1.20 करोड़ रुपये का स्टीमेट तैयार किया है।
क्राइम ब्रांच पुलिस विभाग की एक बेहद महत्वपूर्ण विंग है लेकिन अफसोस यह है कि कई दशकों से क्राइम ब्रांच भवन और स्टाफ की कमी से जूझ रही है। पुलिस लाइन में क्राइम ब्रांच का दफ्तर तो है लेकिन इसमें संसाधनों का टोटा है। लंबे इंतजार के बाद अब क्राइम ब्रांच के दिन बहुरते दिखाई दे रहे हैं। पुलिस मुख्यालय सेे क्राइम ब्रांच के लिए प्रशासनिक भवन बनाने की कवायद तेज हो गई है। पिछले दिनों कार्यदायी संस्था के लोगों ने आकर पुलिस लाइन में जमीन देखी। भवन 875 वर्ग मीटर में डबल स्टोरी बनाया जाएगा। निर्माण के लिए 1.20 करोड़ रुपये का स्टीमेट तैयार किया गया है। अफसरों से ने कागजी कार्रवाई की शुरूआत कर दी है। पूरी फाइल तैयार कर पुलिस मुख्यालय भेज दी गई है। बजट स्वीकृत होने के बाद निर्माण शुरू कर दिया जाएगा। निर्माणदायी संस्था सीधे मुख्यालय के संपर्क में रहेगी। अनुमान लगाया जा रहा है कि एक माह के भीतर काम शुरू हो जाएगा।
महत्वूपर्ण केसों पर काम करती है क्राइम ब्रांच
वैसे तो एसपी के विवेक पर निर्भर है कि वह कौन सा मामला क्राइम ब्रांच की टीम को दें लेकिन ज्यादातर संगीन अपराधों को क्राइम ब्रांच की टीम को सौंपा जाता है। लाखों की ठगी, साइबर क्राइम, आईटी एक्ट, रेप, हत्या या फिर ऐसे मामले जिनका खुलासा करने में थाना पुलिस सफल नहीं हो पाती, वे क्राइम ब्रांच को सौंपे जाते हैं।
वर्तमान में है स्टाफ की किल्लत
क्राइम ब्रांच पर साइबर ठगी के दर्जनों मामले पेंडिंग है। इसका मुख्य कारण स्टाफ की कमी है। हाल ही में दो इंस्पेक्टरों के तबादले के बाद क्राइम ब्रांच में कुल चार कर्मचारी ही रह गए हैं। उन्हीं के ऊपर सारा दारोमदार टिका हुआ है। कई ऐसे मामले ठंडे बस्ते में डाल दिए गए हैं, जिनमें पहले पुलिस ने विवेचना में काफी कुछ हासिल कर लिया था।
पुलिस लाइन में क्राइम ब्रांच का डबल स्टोरी प्रशासनिक भवन बनाया जाना है। इसके लिए कार्यदायी संस्था के लोग जमीन चिन्हित कर चुके है। 1.20 करोड़ रुपये का स्टीमेट भी बनाया जा चुका है। फाइल तैयार कर पुलिस मुख्यालय भेज दी गई है।
- मुनिराज, एसपी