अब तेज होगी एफआईआर की विवेचना
इस मामले में जिलाधिकारी ने दोनों अधिकारियों के निलंबन की संस्तुति की थी, मगर फिलहाल उन्हें पीलीभीत से हटाकर लखनऊ भेजा गया है। हालांकि माना जा रहा है एफआईआर की विवेचना को प्रभावी बनाने के लिए उन्हें जिले से हटाकर नई तैनाती दी गई है।
दरअसल, आयोग के निर्देश पर जिलाधिकारी आलोक कुमार की जांच रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि 31 मई से 28 अगस्त के बीच प्राप्त 13,779 ऑफलाइन फॉर्मों में से 3,309 फॉर्म बिना निर्धारित विधिक प्रक्रिया अपनाए सीधे निरस्त कर दिए गए थे। इसमें दोनों तत्कालीन उपजिलाधिकारियों (एसडीएम) की सीधी लापरवाही और संलिप्तता पाई गई है।
जांच में पुष्टि होने के बाद जिलाधिकारी ने तत्काल प्रभाव से दोनों एसडीएम को उनके प्रभार से हटाकर जिला मुख्यालय से सम्बद्ध कर दिया था। इसके साथ ही, सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी की तहरीर पर दोनों एसडीएम और कंप्यूटर ऑपरेटर अनिल कुमार के खिलाफ नगर कोतवाली में 22 अक्तूबर को धोखाधड़ी और लोक सेवक द्वारा कदाचार समेत सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया गया था। वहीं, संविदा कंप्यूटर ऑपरेटर की सेवाएं तुरंत समाप्त कर दी गई थीं। जिला प्रशासन ने विभागीय कार्रवाई के लिए निर्वाचन आयोग और शासन को विस्तृत रिपोर्ट भेजी थी।