पीलीभीत। बांग्लादेश में हो रही हिंसा से जनपद के तराई क्षेत्र में शारदा डैम की तलहटी में बसे गांवों के लोग परेशान हैं। यहां के अधिकतर परिवारों के रिश्तेदार वहीं रहते हैं। हिंसा के बाद दो दिन पूर्व से उनसे इन लोगों का संपर्क टूट गया है। जिसके चलते यहां उनके सगी-संबंधियों की चिंता बढ़ गई है। यहां रह रहे परिवार वहां की गतिविधियों पर नजर रखे हैं। भारत सरकार से हिंदू परिवारों की सुरक्षा को लेकर ठोस कदम उठाने की अपील भी की है।
कलीनगर तहसील के तराई इलाके में बंगाली बहुल करीब 10 गांव बसे हैं। इन गांवों की आबादी 50 हजार है। इनमें से कई ऐसे परिवार हैं जिन्हें बांग्लादेश के विभाजन के बाद यहां आकर बसाया गया था। यहां के लोगों का कोलकाता और बांग्लादेश से जुड़ाव अधिक है। अधिकतर परिवारों के रिश्तेदार बांग्लादेश में रहते हैं।
तीन दिन पूर्व आंदोलन के बाद शुरू हुई हिंसा और नेताओं के देश छोड़कर भागने की घटना के बाद बांग्लादेश की स्थिति और बिगड़ गई। इसके बाद उपद्रवियों ने हिंदू समुदाय को भी निशाने पर ले लिया। धार्मिक स्थलों में तोड़फोड़ भी शुरू कर दी। जिससे वहां रहने वाले हिंदू परिवार संकट में घिर गए।
उनकी परेशानी का असर तराई क्षेत्र के सीमावर्ती इलाके के लोगों पर भी पड़ा है। यहां बसे रमनगरा, गभिया सहराई, नौजल्हा, पुरैना आदि गांवों के अधिकतर लोग बांग्लादेश में रहने वाले रिश्तेदारों की खैर खबर जानने के लिए परेशान हैं। लोगों का कहना है कि तीन दिन पूर्व तक उनसे संपर्क हो रहा था। आंदोलन के उग्र होने के बाद संपर्क टूट गया है। अब हिंदुओं को निशाना बनाने की खबर मिलने से वे ज्यादा चिंतित हैं। किसी तरह संपर्क करने में जुटे हैं।
हमारे कई परिचित और रिश्तेदार बांग्लादेश में रहते हैं। वहां स्थिति खराब होने के बाद सभी से संपर्क टूट गया है। ऐसे में चिंता बढ़ गई है। भारत सरकार से उम्मीद है कि वह बांग्लादेश के हिंदू परिवारों की सुरक्षा को ठोस कदम उठाएगी।
- संतोष विश्वास
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तीन दिन पूर्व तक बांग्लादेश में रह रहे रिश्तेदारों से संपर्क होता रहा, लेकिन मंगलवार से संपर्क टूट गया। वहां हिंदुओं पर हमले की जानकारी लगने पर चिंता बढ़ गई है। सभी के सकुशल होने की कामना कर रहे हैं।
- खोकन गाईन
गभिया सहराई में हिंसा को लेकर आपस में बातचीत करते बंगाली परिवार के लोग। संवाद
गभिया सहराई में हिंसा को लेकर आपस में बातचीत करते बंगाली परिवार के लोग। संवाद