पीलीभीत। सर्दियों के मौसम की शुरूआत होते ही सुबह-शाम की ठंडी हवाओं ने कानों के मरीजों पर प्रभाव डाला है। मरीजों में कान की नशों में सिकुड़न, कान बहने, दर्द सहित मरीजों की समस्याएं बढ़ गई हैं। इससे मरीजोंं के सुनने की क्षमता पर भी प्रभाव पड़ रहा है। ऑडियोमैट्री जांच सुविधा के अभाव में मरीजों को बाहरी लैब के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।
ठंड के महीनों में कान की नलियों में ठंडी हवाओं से सूजन व संक्रमण की समस्या बढ़ जाती है। इसके अलावा सर्द वातावरण में नाक-कान-गले का कनेक्शन प्रभावित होता है। मौसम में कानों का बहना, सुनने की क्षमता कम होना, भिनभिनाहट रहना शुरू हो जाता है।
शनिवार को ईएनटी की ओपीडी में लगभग 35 मरीज पहुंचे। भीड़ होने के चलते इनको इंतजार भी करना पड़ा। ईएनटी विभागाध्यक्ष डॉ. अंकुर गुप्ता ने परामर्श दिया। लंबी कतारों में लगकर मरीजों को धक्कामुक्की के साथ दवाएं मिल पाईं। समस्याओं पर सावधानियों सहित सलाह देते हुए ईएनटी विभागाध्यक्ष डॉ. अंकुर ने बताया कि सर्दियों में कान को ठंडी हवा से बचाना सबसे जरूरी है।
बाहर निकलते समय कान ढककर रखना, तेज हवा में अधिक देर न रुकना, ठंडी चीजों के अत्यधिक सेवन से बचना और सर्दी-जुकाम होने पर तुरंत इलाज कराना लाभकारी है। कान में दर्द होने पर रुई लगाकर आएं और चिकित्सक से परामर्श लें।