शासन गर्मी की छुट्टियों के दौरान परिषदीय विद्यालयों में मध्यान्ह भोजन बनाने के लिए आदेश पर आदेश जारी करता जा रहा है, लेकिन स्कूलों में चूल्हे ही नहीं जल रहे हैं। हालांकि बेसिक शिक्षा विभाग का दावा है कि जिन स्कूलों में बच्चे पहुंच रहे हैं, उनमें मध्यान्ह भोजन बनाया जा रहा है।
जिले के 1800 प्राइमरी और जूनियर हाईस्कूलों में 21 मई से ग्रीष्मावकाश घोषित किया गया है। शासन ने जिले को सूखाग्रस्त की श्रेणी में होने के चलते स्कूलों में गर्मी की छुट्टियों में भी बच्चों को मध्यान्ह भोजन देने के आदेश दिए हैं। इस बाबत बीएसए भी सभी खंड शिक्षा अधिकारियों को गर्मी की छुट्टियों के दौरान बच्चों को घर से स्कूल बुलाकर उन्हें मध्यान्ह भोजन देने के निर्देश दे चुके हैं। हालांकि इस आदेश के बाद से शिक्षकों में नाराजगी है। वे छुट्टियों में मिड-डे मील बनवाने का विरोध कर रहे हैं। कार्रवाई के डर से शिक्षकों ने स्कूल तो जाना शुरू कर दिया है लेकिन मध्यान्ह भोजन नहीं बनवा रहे हैं। इसके पीछे शिक्षकों का तर्क है कि बच्चे ही नहीं पहुंच रहे हैं तो मिड डे मील किसके लिए बनवाएं।
अब रविवार को भी एमडीएम बनवाने के निर्देश
मध्यान्ह भोजन को लेकर शासन के पहले जारी आदेश का ही अभी ठीक से अनुपालन हो पा रहा है कि अब एक नया आदेश आ गया है। इसके मुताबिक अब स्कूलों में रविवार और अन्य सार्वजनिक अवकाशों में भी मध्यान्ह भोजन देना होगा। मिड-डे मील प्राधिकरण की निदेशक श्रद्धा मिश्रा ने रविवार और सार्वजनिक अवकाश में भी बच्चों को मध्यान्ह भोजन मुहैया कराने का आदेश हाल ही में बीएसए को भेजा हैं।
शासनादेश का अनुपालन कराया जा रहा है, लेकिन गर्मी के चलते अधिकांश विद्यालयों में बच्चे नहीं पहुंच रहे हैं। जिन स्कूलों में बच्चे पहुंच रहे हैं, वहां मध्यान्ह भोजन दिया जा रहा है।
-अंबरीष कुमार यादव, बीएसए