कलीनगर। सैलानियों की सुविधा के लिए टाइगर रिजर्व प्रशासन द्वारा मानसून सफारी शुरू करने का निर्णय लिया गया है। इसके लिए बाइफरकेशन, शारदा डैम समेत छह स्थलों को चिह्नित करने के साथ ही सफारी वाहनों के चालकों और गाइड को भी प्रशिक्षण दिया है। अफसरों ने आदेश को एक जुलाई से प्रभावी रूप करने के निर्देश दिए हैं।
पीलीभीत टाइगर रिजर्व का प्रमुख पर्यटन सत्र 15 नवंबर से छह माह तक चलता है। 15 जून को सत्र समाप्त होते ही पर्यटन स्थल के द्वार बंद कर दिए गए। दरअसल बरसात के चलते जंगल के मार्ग प्रभावित हो जाते हैं। इसके चलते सत्र को बंद कर दिया जाता है। पर्यटन बंद होने से सफारी के वाहन छह माह तक खाली रहते हैं। इसके अलावा गाइड और चालकों के सामने रोजगार की समस्या भी बनी रहती है। वहीं जिले की खूबसूरती को देखने की चाहत रखने वालों की आमद साल भर बनी रहती है। ऐसे में अफसरों ने पर्यटन को बढ़ावा देने पर मंथन करने के बाद मानसून सफारी को शुरू करने का निर्णय लिया है।
माधोटांडा खटीमा मार्ग पर डगा पुल के पास स्थित जसवंत ढाबा के पास सफारी वाहनों को खड़ा करने के लिए इंट्री प्वाइंट बनाया गया है। घूमने के लिए बाइफरकेशन, शारदा डैम, सेल्हा बाबा की दरगाह, सप्त सरोवर के बाद गोमती उद्गम स्थल को चिह्नित किया है। 15 सौ रुपये में सफारी वाहन से इन स्थलों की सैर कराई जाएगी। टाइगर रिजर्व प्रशासन के इस निर्णय के बाद पर्यटन को और बढ़ावा मिलने की संभावना है। डिप्टी डायरेक्टर नवीन खंडेलवाल ने बताया कि टाइगर रिजर्व और जिले के पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ रोजगार के व्यवस्था के लिए मानसून सफारी को शुरू किया जा रहा है।
चिह्नित स्थलों की यह है खासियत
मानसून सफारी के चिह्नित स्थलों में सबकी अलग खासियत है। जंगल के बीच स्थित बाइफरकेशन में नहरों का जाल और खूबसूरत गेस्ट हाउस बना है। पुल क्षेत्र में घूमकर सैलानी आनंद उठा सकते हैं। 22 किमी लंबा शारदा डैम का नजारा भी खास है। एक ओर डैम में हिलोरें लेता पानी और दूसरे ओर बसी बंगाली बाहुल्य आबादी का नजारा खास है। सेल्हा बाबा की प्रसिद्ध दरगाह और अंग्रेजी हुकूमत के दौरान बनाया गया सप्त सरोवर का नजारा भी अलग पहचान रखता है। इसके अलावा गोमती नदी का उद्गम स्थल पर्यटन पर प्रसिद्ध दुर्गानाथ मंदिर के अलावा पर्यटन के लिहाज से भी काफी कुछ खास है। कैंटीन आदि की व्यवस्था भी है।