- थानेदारों की मदद करेगा मैपिंग साफ्टवेयर, अपराधों की फीडिंग शुरू
- एक जनवरी 15 से दर्ज होगा आपराधिक ब्योरा
- विवेचकों को दर्ज करना होगा अक्षांतर-देशांतर
अक्सर होता है कि थानेदार चार्ज संभालने के बाद क्षेत्रीय अपराधों और संवेदनशील स्थानों की जानकारी काफी समय बाद कर पाते हैं, जबकि उससे पहले ही नया अपराध हो जाता है, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। सूबे के सभी जिलों के थानेदार एक क्लिक कर क्षेत्रीय अपराधों, घटना स्थल और संवेदनशील स्थानों आदि की पूरी जानकारी कर सकेंगे। पुलिस महकमा मैपिंग साफ्टवेयर डाटा लोड कर निर्धारित किए गए 16 किस्म के अपराधों का पूरा ब्योरा फीड कर रहा है। इसके लिए कर्मचारियों को भी वर्कशाप कर प्रशिक्षित किया जा चुका है।
अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए पुलिस की यह बड़ी मुहिम है। अक्सर थाना प्रभारी और अधिकारी कम समय में क्षेत्रीय अपराध और अपराधों के पैटर्न की जानकारी नहीं कर पाते हैं। इसका लाभ उठाते हुए अपराधी घटनाओं को अंजाम दे देते हैं। थानेदार को पल भर में पूरी जानकारी मिल सके। इसके पुलिस महकमे ने मैपिंग साफ्टवेयर अपलोड किया है। साफ्टवेयर लोड करने से लेकर डाटा फीडिंग तक के कार्य का सुपरविजन आईजी पीएसी लखनऊ जोन आशुतोष पांडेय कर रहे हैं। उन्होंने प्रत्येक जोन के आईजी को जोन के जिलों का पर्यवेक्षण अधिकारी नियुक्ति किया है। यह कार्य खीरी, पीलीभीत, शाहजहांपुर समेत सूबे के सभी जिलों में शुरू किया गया है। पीलीभीत जिले में एक जनवरी 2015 से अब तक हुईं हत्या, हत्या का प्रयास, दंगा, महिला और बच्चों से संबंधित अपराध, अपहरण, लूट, नकबजनी, चोरी, वाहन चोरी, चेन स्नेचिंग समेत 16 किस्म के अपराधों का डाटा जिला अपराध ब्यूरो (डीसीआरबी) फीड कर रहा है, जिसमें अपराध का प्रकार, स्थान, अपराध का पैटर्न, उसमें शामिल अपराधियों की संख्या, समय आदि की पूर्ण जानकारी होगी। इतना ही नहीं इन अपराधों के विवेचक घटना स्थल पर जाएंगे तो एंड्रायड मोबाइल में स्थापित नेट मॉनीटर सॉफ्टवेयर से उस घटना स्थल का अक्षांतर और देशांतर भी थाने पर आकर अपराध रजिस्टर में अंकित करेंगे।
क्राइम मैपिंग सिस्टम व्यवस्था लागू की गई है। फिलहाल मैपिंग साफ्टवेयर डाटा जिला अपराध ब्यूरो (डीसीआरबी) पर अपलोड कर डाटा फीडिंग का कार्य चल रहा है। इसके बाद सभी थानों पर भी यह सॉप्टवेयर लोड कर थाना क्षेत्रों में होने वाली घटनाओं और संवेदनशील स्थानों की पूरी जानकारी फीड की जाएगी। इससे पुलिस को अपराधों पर अंकुश लगाने में काफी मदद मिलेगी।
- अनिल कुमार सिंह, एसपी